रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ने अपनी शिक्षा व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालते हुए एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और उच्च शिक्षा विभाग की सक्रियता से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को धरातल पर उतारने का संकल्प अब एक सशक्त वास्तविकता बन चुका है। जुलाई 2024 से राज्य के समस्त सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों सहित महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर इस नीति को पूर्णतः लागू कर दिया गया है।
  
विद्यार्थी-केंद्रित लचीली शिक्षा प्रणाली
      अब शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। राज्य ने स्नातक स्तर पर सेमेस्टर प्रणाली और क्रेडिट आधारित पद्धति को अपनाया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता मल्टीपल एंट्री और एग्जिट (बहुप्रवेश-बहुनिकास) का प्रावधान है। अब छात्र अपनी रुचि के अनुसार विषयों का चुनाव करने के लिए स्वतंत्र हैं, जिससे उनकी रचनात्मकता को नए पंख मिले हैं। नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम को चार वैज्ञानिक भागों में विभाजित किया गया है, ताकि छात्र का सर्वांगीण विकास हो सके, जिसमे कोर्स क्रेडिट एवं लर्निंग आउटकम्स, कोर्स लर्निंग कंटेंट्स, कोर्स लर्निंग रिसोर्सेज और कोर्स लर्निंग एसेसमेंट शामिल है। इसके साथ ही पाठ्यक्रम में डीएससी (डिसिप्लिन स्पेसिफिक), डीएसई (इलेक्टिव), जीई (जेनेरिक इलेक्टिव), एइसी (एबिलिटी एन्हांसमेंट) और व्हीएसी (वैल्यू एडिशन) जैसे आधुनिक घटकों को शामिल किया गया है।

भारतीय ज्ञान परंपरा का पुनर्जागरण
      छत्तीसगढ़ के नए पाठ्यक्रम में आधुनिक विज्ञान के साथ-साथ हमारी गौरवशाली विरासत का अनूठा संगम है। पाठ्यक्रम में आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, वराहमिहिर जैसे प्राचीन मनीषियों से लेकर स्वामी विवेकानंद, वीर सावरकर और सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे महापुरुषों के विचारों को समाहित किया गया है। स्थानीय संसाधनों, सांस्कृतिक धरोहर और छत्तीसगढ़ी स्वदेशी हुनर को भी शिक्षा का अभिन्न अंग बनाया गया है।

शिक्षा के नए आयामः उच्च शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन

भविष्य की तैयारी कौशल और रोजगार
       शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उसे नवाचार और कौशल विकास से जोड़ा जा रहा है। छात्रों को डिग्री के साथ-साथ रोजगार के योग्य बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।स्थानीय मांग के अनुरूप स्वदेशी हुनर और स्वरोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है। उद्योगों के साथ समन्वय कर इंटर्नशिप और स्टार्टअप पोर्टल की शुरुआत के साथ-साथ नए विचारों को व्यापार में बदलने के लिए महाविद्यालयों में विशेष केंद्रों की स्थापना की जा रही है। 

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
       डिजिटल क्रांति के इस दौर में राज्य के सभी विद्यार्थियों का पंजीकरण एकेडमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट में अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे उनके शैक्षणिक क्रेडिट डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेंगे। इसके साथ ही, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच प्रदेश के दूरस्थ अंचलों तक सुनिश्चित की गई है। शिक्षा व्यवस्था को और अधिक जवाबदेह बनाने के लिए 30 प्रतिशत सतत आंतरिक मूल्यांकन की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे छात्रों की प्रगति का निरंतर आकलन हो सके।

ज्ञान, कौशल और संस्कारों से विकसित छत्तीसगढ़ के सपने होंगे साकार 
       छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा का यह रूपांतरण केवल नीतिगत बदलाव नहीं, बल्कि एक भविष्यगामी विजन है। ज्ञान, कौशल और संस्कारों के इस संगम से राज्य के युवा न केवल आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ के सपने को भी साकार करेंगे। उच्च शिक्षा विभाग का यह प्रयास न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाएगा, बल्कि छात्रों में कार्यक्षमता, दक्षता और नवाचार की प्रवृत्ति को भी प्रोत्साहित करेगा। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नीति निर्धारण की यह प्रक्रिया एक सशक्त शैक्षणिक भारत की नींव रख रही है।

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प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।