34 लाख रूपए की लागत से तालाब सौंदर्यीकरण एवं छठ घाट निर्माण का किया भूमिपूजन, श्रद्धालुओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

रायपुर। पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की डबल इंजन सरकार जनआस्था से जुड़े स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि अंबिकापुर विधानसभा क्षेत्र में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और धार्मिक-सांस्कृतिक अधोसंरचना के विकास के लिए निरंतर योजनाबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 12 में शनि मंदिर तालाब के सौंदर्यीकरण एवं छठ घाट निर्माण कार्य का विधिवत भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्रवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह विकास कार्य क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और जनसुविधाओं को नई दिशा देने वाला साबित होगा। लगभग 34 लाख रुपये की लागत से किए जाने वाले इस कार्य के अंतर्गत शनि मंदिर तालाब का सौंदर्यीकरण, परिसर का व्यवस्थित विकास तथा श्रद्धालुओं के लिए सुविधायुक्त छठ घाट का निर्माण कराया जाएगा। इससे न केवल धार्मिक आयोजनों एवं पर्वों के दौरान लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी, बल्कि क्षेत्र की स्वच्छता, सौंदर्य एवं सामाजिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि धार्मिक स्थल केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने, संस्कृति को जीवित रखने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का माध्यम भी होते हैं। शनि मंदिर तालाब एवं छठ घाट के विकसित होने से क्षेत्र के नागरिकों, विशेषकर छठ पर्व मनाने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित वातावरण प्राप्त होगा। अग्रवाल ने आगे कहा कि उनका संकल्प है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और अंबिकापुर निरंतर प्रगति एवं विकास के नए आयाम स्थापित करे। उन्होंने क्षेत्रवासियों से भी विकास कार्यों में सहभागिता निभाने और सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण में सहयोग करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। क्षेत्रवासियों ने इस विकास कार्य के लिए राज्य सरकार एवं मंत्री राजेश अग्रवाल के प्रति आभार व्यक्त किया।

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प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।