’महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सूरजपुर से दिया महिला सशक्तिकरण का संदेश’

रायपुर। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि “आत्मनिर्भर महिला ही सशक्त परिवार और समृद्ध समाज की आधारशिला है।” उन्होंने आज सूरजपुर जिले में आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के सामूहिक विवाह समारोह में शामिल होकर नवदंपत्तियों को आशीर्वाद दिया और उनके सुखद दांपत्य जीवन की कामना की। प्रदेशभर में आज आयोजित सामूहिक विवाह समारोहों में सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विविधता की अनूठी झलक देखने को मिली। राज्य स्तर पर प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में कुल 2188 जोड़े 8 मई को विवाह बंधन में बंधे, जबकि अन्य चरणों सहित यह संख्या बढ़कर 2393 जोड़ों तक पहुंच गई है।

सूरजपुर जिले में आयोजित भव्य समारोह में 100 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न इस आयोजन में मंत्रोच्चार, फेरे, सिंदूरदान और वरमाला की रस्में पूरी की गईं। शहनाइयों की गूंज, बैंड-बाजों की मधुर धुन और पुष्प वर्षा के बीच नवदंपत्तियों ने जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए सम्मान और सहारा दोनों है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन द्वारा इस वर्ष दो चरणों में सामूहिक विवाह का आयोजन किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक हितग्राहियों तक योजना का लाभ पहुंच सके। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि स्वावलंबी महिलाएं न केवल अपने परिवार को मजबूत बनाती हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने नवदंपत्तियों से शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में वन विकास निगम के अध्यक्ष रामसेवक पैकरा ने उपस्थित जनसमुदाय को बाल विवाह मुक्त सूरजपुर बनाने की शपथ दिलाई और इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया। विधायक भूलन सिंह मरावी ने कहा कि राज्य शासन अंत्योदय की भावना के साथ कार्य करते हुए अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचा रहा है। सामूहिक विवाह समारोह में नवदंपत्तियों के चेहरों पर खुशी और संतोष झलक रहा था, वहीं बेटियों को विदा करते समय कई परिजनों की आंखें नम हो गईं। सभी ने इस गरिमामय आयोजन के लिए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। योजना के अंतर्गत प्रत्येक नवविवाहित जोड़े को 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे अपने नए जीवन की शुरुआत सशक्त रूप से कर सकें।

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प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।