रायपुर। किसी भी राज्य की प्रगति का सशक्त आधार उसकी महिलाओं की स्थिति होती है। जब महिलाएं आर्थिक, सामाजिक और मानसिक रूप से सशक्त होती हैं, तब विकास की प्रक्रिया न केवल तीव्र होती है बल्कि समावेशी भी बनती है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित‘महतारी वंदन योजना’इसी समावेशी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में स्थापित हो चुकी है। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘गारंटी’ के उस संकल्प को भी साकार कर रही है, जिसमें महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखाई देती है। महतारी वंदन योजना के तहत प्रदेश की पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। मार्च 2024 में प्रारंभ इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत अब तक 27 किस्तों में कुल 17,523 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। यह आंकड़ा केवल आर्थिक सहायता का प्रतीक नहीं, बल्कि राज्य सरकार की उस संवेदनशील सोच का परिचायक है, जो महिलाओं को सशक्त बनाकर समाज को मजबूत करने की दिशा में निरंतर कार्यरत है। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित भी करती है। प्रदेश के विभिन्न अंचलों से सामने आ रही प्रेरक कहानियां इस तथ्य को प्रमाणित करती हैं कि यदि सही दिशा और अवसर मिले, तो महिलाएं अपने जीवन की तस्वीर स्वयं बदल सकती हैं।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड के ग्राम मझगंवा की श्रीमती हेमा सिंह इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने योजना से प्राप्त राशि को खर्च करने के बजाय बचत और निवेश का माध्यम बनाया। धीरे-धीरे उन्होंने एक छोटा किराना स्टोर प्रारंभ किया, जो आज उनके परिवार की आय का स्थायी स्रोत बन चुका है। उनकी यह यात्रा बताती है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।

इसी प्रकार अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम रामनगर की विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय की श्रीमती करियो ने योजना की राशि से बकरी पालन प्रारंभ कर आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय कदम उठाया है। आज उनके पास कई बकरियां हैं और यह कार्य उनके परिवार की आजीविका का मजबूत आधार बन गया है। उनके जीवन स्तर में आया सकारात्मक बदलाव इस योजना की प्रभावशीलता को स्पष्ट करता है।

वहीं मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के ग्राम झाफल की श्रीमती गौरी राजपूत इस योजना से प्राप्त राशि का उपयोग अपनी शिक्षा में कर रही हैं। उनके लिए यह योजना केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि अपने सपनों को साकार करने का माध्यम बन गई है।

इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि महतारी वंदन योजना ने महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की क्षमता, आत्मविश्वास और आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान किया है। महिलाएं अब इस राशि का उपयोग स्वरोजगार, शिक्षा, पशुपालन एवं पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति में कर रही हैं, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई धारा प्रवाहित हो रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई ‘गारंटी’ का मूल भाव यही है कि देश की हर महिला को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जाए। छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना इसी गारंटी का सशक्त क्रियान्वयन है, जो केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला सशक्तिकरण को राज्य के विकास का मूल आधार माना है, वहीं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से इसे जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आज महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की एक सुदृढ़ नींव बन चुकी है। यह योजना महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से सक्षम बना रही है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान कर रही है।

निस्संदेह, ‘महतारी वंदन योजना’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के साथ छत्तीसगढ़ की महिलाओं के जीवन में एक नई सुबह लेकर आई है। यह पहल आने वाले समय में प्रदेश के समग्र, संतुलित और समावेशी विकास की मजबूत आधारशिला सिद्ध होगी।

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प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।