अंबिकापुर। शहर से लगे ग्राम खैरबार, बांकी डैम मार्ग के पनिका पारा में आवारा कुत्तों के हमले में चीतल प्रजाति के वन्य जीव ‘कोटरीÓ की मौत हो गई। चिंताजनक बात यह है कि पखवाड़े भर के भीतर इसी स्थान पर कुत्तों के द्वारा वन्य जीव पर हमले की यह दूसरी घटना है, जो वन विभाग की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में ले रहा है।
जानकारी के मुताबिक, जंगल से भटककर एक कोटरी खैरबार गांव के समीप पनिका पारा इलाके में पहुंच गई थी। इसी दौरान आवारा कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। कुत्तों के हमले में गंभीर रूप से घायल कोटरी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब पखवाड़े भर पहले भी इसी जगह पर आवारा कुत्तों ने एक बड़े हिरण पर हमला कर दिया था, जिसे ग्रामीणों ने बचाया था और वन अमले के सुपुर्द कर दिया था। इस हिरण को संजय वन वाटिका में रखा गया था। बताया जा रहा है कि तीन दिन पूर्व संजय वन वाटिका में आवारा कुत्तों के हमले में जिन 15 हिरणों की मौत हुई थी, उनमें यह हिरण भी शामिल था, जिसे ग्रामीणों ने कुत्तों से बचाकर वन विभाग के सुपुर्द किया था। बहरहाल वन वाटिका में हुई घटना की उच्चस्तरीय जांच जारी है। इधर घटना के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। वन्य जीव पर शहर से लगे खैरबार इलाके में हमले की लगातार दूसरी घटना सामने आने के बाद वन विभाग भले चिंतित न हो, लेकिन इलाके के लोग दहशत और चिंता में हैं। इसके पीछे कारण वन्य जीवों के गांव के समीप पहुंचने से आवारा कुत्तों का लगातार आक्रामक रूख होना है, जो बच्चों और पालतू मवेशियों के लिए भी आने वाले समय में खतरे का कारक बन सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर से लगे जंगल क्षेत्रों में वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं, इसका खामियाजा बेजुबान जानवरों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने वन विभाग से इस दिशा में तत्काल सख्त कदम उठाने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और वन्य जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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