अंबिकापुर। सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय सुभाषनगर में समग्र व्यक्तित्व निर्माण विषय पर आयोजित 15 दिवसीय मूल्य संवर्धन कार्यशाला का समापन 25 मार्च को हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज के केंद्रीय प्रतिनिधि युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक केदार प्रसाद दुबे रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा हमारे वर्तमान एवं भविष्य युवा ही हैं। अपना विकास करना ही व्यक्तित्व विकास करना है। उन्होंने कहा भारत एक ऐसा देश है जहां समृद्धि से भरा हुआ वातावरण है, हमें हमेशा अपने सभ्यता को साथ रखना है। सभ्यता को बचाए रखने वाला देश हमारा भारत ही है, जो सभ्यता को विकास की ओर ले जाता है। हमें किसी से दिखावा नहीं करना है, सभी से प्रेम करना है, सभी को सकारात्मक ऊर्जा देना है। उन्होंने कहा मनुष्य में दिव्य ऊर्जा होती है, हमें उससे पहचानने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा व्यक्तित्व विकास का अर्थ अपने अंदर सकारात्मक गुणों का समावेश करना और दूसरों की सहायता करना है। हमें सकारात्मक सोच रखनी चाहिए, हर परिस्थिति में धैर्य बनाए रखना चाहिए, और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना चाहिए। आत्मविश्वास व्यक्तित्व विकास की सबसे बड़ी ताकत है। जब हमें खुद पर विश्वास होता है, तो हम किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। अंत में उन्होंने कहा हमें प्रतिदिन कुछ नया सीखने, अपनी कमियों को सुधारने और अपने अंदर छिपी क्षमताओं को पहचानने का प्रयास करना चाहिए।
इसके पहले कार्यक्रम का परिचय महाविद्यालय की विभागाध्यक्ष रानी रजक द्वारा दिया गया। उन्होंने कहा  यह केवल एक कार्यक्रम का अंत नहीं है, बल्कि हमारे अंदर हुए सकारात्मक परिवर्तन और नए संकल्पों की शुरुआत का दिन है। ओम पाण्डेय ने कहा कि डिजिटलीकरण के दौर में हम किस प्रकार व्यक्तित्व का विकास करें, इसके लिए सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा आज हम जिस दुनिया में जी रहे हैं, वहां जानकारी की कोई कमी नहीं है। एक क्लिक पर हमें ज्ञान मिल जाता है। लेकिन असली चुनौती सही जानकारी का चयन और उसका सही उपयोग है। यही हमारे व्यक्तित्व को मजबूत बनाता है। नंदकिशोर गोस्वामी जिला समन्वयक सरगुजा गायत्री परिवार ने कहा कि हमें युवाओं के व्यक्तित्व का विकास करना है। व्यक्तित्व विकास का अर्थ केवल सुंदर दिखना या अच्छा बोलना नहीं है, बल्कि हमारे विचार, व्यवहार, आत्मविश्वास और चरित्र का संपूर्ण विकास है। एक व्यक्ति का असली व्यक्तित्व उसके आचरण और उसके व्यवहार से झलकता है। इस मौके पर प्रदीप शर्मा प्रबंध ट्रस्टी, राजेश कुमार जायसवाल असिस्टेंट इंजीनियर विद्युत विभाग, लुकेश, लालचंद रजवाड़े, लक्ष्मी सिंह, अर्चना सिन्हा, सरस्वती तिवारी, शांति सिंह, पूनम जायसवाल, अंजना तिवारी, दिव्या सिंह, रेखा साहू अतिथि बतौर उपस्थित थे। अंत में सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रद्धा मिश्रा ने कार्यक्रम के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी, साथ ही अतिथियों का  धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम का समापन किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक प्रियलता जायसवाल, उर्मिला यादव, मिथलेश कुमार गुर्जर, सुप्रिया सिंह, सविता यादव, सीमा बंजारे, पूजा रानी, ज्योत्स्ना राजभर, अर्चना सोनवानी, नितेश कुमार यादव एवं बीएड चतुर्थ सेमेस्टर के प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति रही।

Spread the love