ओबीसी महिला कांग्रेस का राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, विभिन्न राज्यों से मातृशक्ति हुई शामिल

नईदिल्ली। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी कार्यालय, इंदिरा भवन नई दिल्ली के आडिटोरियम में ओबीसी महिला कांग्रेस का राष्ट्रीय महिला सम्मेलन 9 मार्च को आयोजित किया गया। सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आई मातृशक्ति ने भाग लेकर सामाजिक न्याय और महिला नेतृत्व को मजबूत करने का संकल्प लिया। आयोजन में छत्तीसगढ़ एवं सरगुजा संभाग से भी बड़ी संख्या में मातृशक्ति की भागीदारी रही। इनका नेतृत्व ओबीसी कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक लक्ष्मी गुप्ता ने किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ और सरगुजा संभाग से आई सभी महिलाओं का परिचय ओबीसी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जय हिन्द से कराया, और छत्तीसगढ़ की ओर से सम्मान स्वरूप ओबीसी का गमछा ओढ़ाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत किया।
इस ऐतिहासिक सम्मेलन के सफल आयोजन की प्रमुख कर्ताधर्ता, पिछड़ा वर्ग के महान नेता स्व. शरद यादव की सुपुत्री सुहासिनी यादव ने छत्तीसगढ़ और सरगुजा संभाग से आई मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी को सराहा। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति यह दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं सामाजिक न्याय की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने इसके लिए लक्ष्मी गुप्ता को विशेष रूप से धन्यवाद दिया कि उनके नेतृत्व में इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हुई है। सम्मेलन के दौरान मातृशक्ति की प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष अपनी बात रखी, जिस पर राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सकारात्मक सहमति जताते हुए कहा कि निकट भविष्य में छत्तीसगढ़ और सरगुजा संभाग की महिलाओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी दी जाएगी। कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की उपस्थिति ने सम्मेलन को और भी प्रेरणादायक बना दिया। अपने संबोधन में राहुल गांधी ने महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्ग के अधिकारों को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इनके विचारों से सम्मेलन में उपस्थित सभी महिलाएं प्रभावित हुईं। राहुल गांधी ने अपने प्रोटोकॉल से हटकर महिलाओं के बीच पहुंचकर संवाद किया, और आत्मीयता से बातचीत की। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने लक्ष्मी गुप्ता द्वारा ओबीसी समाज व संगठन को मजबूत करने और सामाजिक न्याय की आवाज को आगे बढ़ाने में दिए जा रहे योगदान को सराहा। सम्मेलन न केवल महिला नेतृत्व को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि सामाजिक न्याय की विचारधारा को नई ऊर्जा देने वाला भी रहा।

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