सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय मे दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
फोटो- सिंगल कॉलम में
अंबिकापुर। सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय सुभाषनगर में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘विकसित भारत के निर्माण में पंच परिवर्तन की भूमिका पर किया गया। प्रथम दिवस मुख्य वक्ता टोप लाल वर्मा प्रान्त संचालक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, देवनारायण साहू संगठन मंत्री विद्या भारती, मुख्य अतिथि सुभाषचंद्र अग्रवाल अध्यक्ष सरस्वती शिशु मंदिर समिति, राजरूप छाजेड व्यवस्थापक, प्रतिमा त्रिपाठी सह व्यवस्थापक, डॉ. आशीष तिवारी प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय जरही, डॉ. राम आशीष तिवारी, सहायक प्राध्यापक, विशाल गुप्ता सहायक प्राध्यापक प्राणीशास्त्र, सविता सिंह रहे। महाविद्यालय की विभागाध्यक्ष रानी रजक ने कार्यक्रम के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी।
मुख्य वक्ता टोपलाल वर्मा ने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय सेमिनार की शुभकामनाएंं दी। उन्होंने कहा भारत युवाओं का देश है, युवा चाहे तो समाज में, देश में कोई भी परिवर्तन ला सकता है। हमारी अर्थव्यवस्था में तेजी से विकास हो रहा है, निश्चित ही हमारा देश 2047 तक विकसित भारत बनेगा। जाति, धर्म, अमीरी-गरीबी के कारण हमें भेदभाव नहीं करना चाहिए, सभी को एक समान तथा एक नजर से देखना चाहिए। उन्होंने परिवार के बारे में बताते हुए कहा कि पहले भारतीय संस्कृति में संयुक्त परिवार हुआ करते थे, आज पाश्चात्य संस्कृति को अपनाते हुए लोग एकल परिवार की तरफ अग्रसर हो रहे हैं, जिससे हमारा समाज खंडित हो रहा है। यदि एक बच्चा संयुक्त परिवार में रहता है, तो उसे रिश्ते एवं संस्कारों का ज्ञान होता है, वहीं यदि बच्चा एकल परिवार में रहे तो वे संस्कारों एवं रिश्तों से वंचित रह जाते हैं। अंत में उन्होंने कहा पंच परिवर्तन को समाज में अपनाकर हम देश को विकास की ओर ले जा सकते है। देवनारायण साहू ने अपने उद्बोधन में पंच परिवर्तन में योग के महत्व सहित अन्य महत्वपूर्ण बातों पर प्रकाश डाला। राज रूप छाजेड ने समाज में बदलाव करने के लिए पहले स्वयं को बदलने की बात कही। सुभाष अग्रवाल ने पंच परिवर्तन के बारे में बताते हुए कहा कि  समाज में जाति, वर्ग, भाषा, धर्म आदि के आधार पर विभाजन देखने को मिलता है। सामाजिक समरसता का उद्देश्य इन भेदभावों को समाप्त कर आपसी प्रेम, भाईचारा और समानता की भावना विकसित करना है।  उन्होंने जल का आवश्यकता अनुरूप उपयोग और प्लास्टिक का उपयोग करने से बचने का आग्रह किया। तत्पश्चात बीएड प्रथम वर्ष एवं द्वितीय वर्ष के प्रशिक्षणार्थियों द्वारा प्रेजेंटेंशन दिया गया। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रद्धा मिश्रा ने कार्यक्रम के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने कहा यह संगोष्ठी भावी शिक्षक के लिए बहुत ही आवश्यक है। कार्यक्रम में महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक प्रियलता जायसवाल, उर्मिला यादव, मिथलेश कुमार गुर्जर, सुप्रिया सिंह, सविता यादव, सीमा बंजारे, पूजा रानी, ज्योत्सना राजभर, अर्चना सोनवानी, गोल्डन सिंह, अजीत सिंह परिहार, नितेश कुमार यादव, सुन्दरराम एवं बीएड के प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति रही।

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