सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय में ‘मानव अधिकार, समानता, गरिमा और न्याय की ओरÓ विषय पर हुई कार्यशाला

अंबिकापुर। सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय सुभाषनगर में राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा ‘मानव अधिकार, समानता, गरिमा और न्याय की ओरÓ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. निधि सक्सेना एसोसिएट प्रोफेसर फैकल्टी ऑफ लॉव यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली ने ऑनलाइन संबोधन में कहा कि मानव अधिकार मानव की आवश्यकता के अनुरूप बनाया गया है। मानव अधिकार यूनिवर्सल है, हमें जो जीने का अधिकार भारत में मिला है, वही हमें बाहर भी मिला हुआ है। फंडामेन्टल राइट्स सबको मिला है। सरकार का काम है मनुष्य को मानव अधिकार देना और उसका संरक्षण करना। साथ ही उन्होंने जॉन लॉक एवं रूसो द्वारा दिए गए मानव अधिकार के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि मानव अधिकारों का उद्देश्य दुनिया के हर व्यक्ति को जाति, धर्म, लिंग, भाषा या राष्ट्रीयता के भेद बिना सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार देना है। भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्याय पाने का अधिकार, सभी मानव अधिकारों के अंतर्गत आते हैं। उन्होंने कहा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मानव अधिकारों के महत्व को विश्व स्तर पर स्वीकार किया गया। इसी उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र ने पूरी दुनिया के लोगों के लिए मानव अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया। आज भी विश्वभर में कई संस्थाएं इन अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्य कर रही हैं, जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल। भारत में भी मानव अधिकारों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग कार्य करता है, जो लोगों के अधिकारों के उल्लंघन की जांच करता है और न्याय दिलाने में मदद करता है। उन्होंने डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स के बारे में भी विस्तार से बताया।
डॉ. समन नारायण उपाध्याय असिस्टेंट प्रोफेसर ऑफ लॉ डिपार्टमेंट, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा ने कहा कि मानव होने के नाते जितने अधिकार हमें प्राप्त होते हंै, उस अधिकार से मानव अपने जीवन को सुचारु रूप से चला सकता है। उन्होंने सबसे पहले शिक्षा के बारे में बताया और कहा शिक्षा का मूल उद्देश्य व्यवहार में होने वाला परिवर्तन है, साथ ही मनुष्य का सर्वांगीण विकास भी करता है। हमें इस प्रकार शिक्षा प्राप्त करना है जो समाज में सेवा का पर्याय बन सके और समाज के लिए उपयोगी हो। उन्होंने कहा राइट टू एजुकेशन में 6 से 14 वर्ष के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा कक्षा एक से 8 तक दी जा रही है। उन्होंने भारत के  फंडामेन्टल राइट्स के बारे में विस्तार से बताया। अमृता जायसवाल गायत्री परिवार ट्रस्टी अंबिकापुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानव का अधिकार और कर्तव्य एक दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा सबसे पहले हमें कर्तव्य को जानना है, कर्तव्य को बताते हुए आत्मबोध करना ही हमारा कर्तव्य है। व्यवहार, विचार, आचरण ही हमारे संस्कार हैं। सुबह हमें प्रात: जल्दी उठना चाहिए, प्रतिदिन मेडिटेंशन करना चाहिए, अपने पूरे दिन का दिनचर्या निर्धारित करना चाहिए। कहा जाता है सुबह जो कार्य करते हंै, वह निश्चित ही सफल होता है।
प्रो. अशोक कुमार प्रोफेसर आफ लॉ, हेड डीन स्कूल ऑफ लॉ एंड  गवर्नेंस सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार ने ऑनलाइन प्रशिक्षणार्थियों को मानव अधिकार के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही उन्होंने कहा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी सत्य, अहिंसा और समानता के माध्यम से मानव गरिमा और अधिकारों की रक्षा का संदेश दिया। उनका जीवन हमें सिखाता है कि दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना ही सच्ची मानवता है। मानव अधिकार केवल पाने की चीज नहीं, बल्कि निभाने की जिम्मेदारी भी है। जब हम दूसरों के अधिकारों का सम्मान करते हैं, तभी हमारे अधिकार भी सुरक्षित रहते हैं। हमें जागरूक नागरिक बनकर अन्याय, भेदभाव और शोषण के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। अंत में उन्होंने कहा कि मानव अधिकारों की रक्षा ही एक शांतिपूर्ण, न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज की नींव है। आइए हम सभी मिलकर एक ऐसी दुनिया बनाने का संकल्प लें, जहां हर व्यक्ति को सम्मान और समानता के साथ जीने का अधिकार मिले। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डॉ. श्रद्धा मिश्रा ने कार्यक्रम के बारे मे संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने कहा हमें हर व्यक्ति के मानव अधिकार को समझना होगा। हमें ऐसा शिक्षक बनना है जो छात्रों को अच्छी शिक्षा दे सके और उन्हें आत्मनिर्भर बना सके। उन्होंने अतिथियों का आभार प्रदर्शन करके कार्यक्रम का समापन किया। कार्यक्रम मे महाविद्यालय की कार्यक्रम अधिकारी रासेयो रानी रजक, सहायक प्राध्यापक प्रियलता जायसवाल, उर्मिला यादव, मिथलेश कुमार गुर्जर, सुप्रिया सिंह, सविता यादव, सीमा बंजारे, पूजा रानी, नितेश कुमार यादव एवं बीएड द्वितीय सेमेस्टर एवं चतुर्थ सेमेस्टर के प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति रही।

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