अंबिकापुर। राजीव गांधी शासकीय पीजी कॉलेज में विगत तीन दिनों से चल रही अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय, गुना के कुलपति प्रो. किशन यादव के मुख्य आतिथ्य में हुआ। संगोष्ठी के समापन सत्र में विशिष्ट अतिथि प्रो. आर.एन. सिंह, प्रति-कुलपति, भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग रहे। मुख्य अतिथि प्रो. किशन यादव, अकादमिक जगत के जाने माने शिक्षाविद एवं मध्य प्रदेश के सबसे युवा कुलपति थे।
छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में सतत विकास में अर्थशास्त्र की भूमिका पर शोध की आवश्यकता है। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षक को अपने कर्तव्य के बारे हमेशा सचेत रहना चाहिए। हमें निरंतर विचार करना चाहिए कि सामाजिक समस्याओं जैसे आर्थिक असामनता, बेरोजगारी और अशिक्षा से कैसे निजात पाया जाए। यदि हमें जीवन में सफल व्यक्ति बनना है तो तीन चीजों का ध्यान रखना आवश्यक है-सुनने, लिखने एवं बोलने की क्षमता।
भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग के प्रति-कुलपति प्रो. आर.एन. सिंह ने अपने उद्बोधन में छत्तीसगढ़ की अर्थव्यस्था, प्राकृतिक संपदा एवं सतत विकास की बात कही। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अनिल कुमार सिन्हा ने संगोष्ठी में पधारे अतिथिगणों का स्वागत करते हुए कहा कि संगोष्ठी का लाभ अकादमिक जगत के शिक्षाविद एवं शोधार्थियों को अवश्य मिलेगा। कार्यक्रम में पीजी कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. जय नारायण पांडेय द्वारा लिखित पुस्तक ‘आध्यात्मिक समाजवाद: सतयुग के चरणÓ का विमोचन किया गया। तकनीकी सत्र में विधि विभाग से सहायक प्राध्यापक डॉ. माधवेन्द्र तिवारी ने अपना शोध कार्य प्रस्तुत किया। एसेड्स के चीफ कांफ्रेंस कन्वीनर प्रो. विनोद कुमार श्रीवास्तव एवं एसेड्स टीम द्वारा संगोष्ठी के अंतिम चरण में ऐसेड्स द्वारा ज्ञान रत्न पुरस्कार प्रो. किशन यादव, कुलपति, तात्या टोपे विश्वविद्यालय, गुना, मध्य प्रदेश को दिया गया। ऐसेड्स की कोषाध्यक्ष एवं ललित कला विभाग, राममनोहर लोहिया विश्वविद्यालय, अयोध्या की डॉ. सरिता द्विवेदी द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई। समापन सत्र में प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह एवं रामनामी से मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं अन्य अतिथियों का सम्मान किया गया। प्रदर्शनी में प्रदर्शित स्मृति चिन्हों से भी अतिथियों को सम्मानित किया गया। समापन कार्यक्रम में महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. एस.एन. पांडेय, प्रो. राजकमल मिश्र, प्रो. प्रतिभा सिंह, प्रो. जरमिना तिर्की उपस्थित रहे। महाविद्यालय के प्राध्यापकों को संगोष्ठी में विशेष योगदान के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर एक्सीलेंस अवार्ड द्वारा सम्मानित किया गया। प्राचार्य प्रो. सिन्हा ने बताया कि संगोष्ठी में प्रस्तुत किए गए शोध पत्र चर्चा का विषय रहे और महाविद्यालय में अकादमिक गतिविधियों का संचालन इसी तरह संपन्न होता रहेगा, महाविद्यालय निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है। मंच संचालन डॉ. राश्मीत कौर एवं डॉ. हर्षदीप सिंह धंजल ने एवं धन्यवाद ज्ञापन अर्थशास्त्र विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. रजनी सारथी ने दिया।

Spread the love