अंबिकापुर। राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग एवं अर्थशास्त्र के राष्ट्रीय एसोसिएशन एसेड्स के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी  ‘नेविगेटिंग ग्लोबल चैलेंजेस, सोशियो-इकोनॉमिक पर्सपेक्टिव्स ऑन सस्टेनेबिलिटी, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजीÓ के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ 18 फरवरी को महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में किया गया। इस मौके पर संगोष्ठी के मुख्य अतिथि देश के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं कुलपति अटल बिहारी विश्वविद्यालय बिलासपुर प्रो. ए.डी.एन. बाजपेयी ने अपने उद्बोधन में समावेशी एवं संतुलित विकास के लिए आध्यात्मिकता की आवश्यकता पर गहन चर्चा की। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक समाजवाद के द्वारा ही शांति, समता एवं समग्रता के साथ विकास संभव है।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अनिल कुमार सिन्हा ने देश-विदेश से आए सभी शिक्षाविदों, आगंतुकों एवं शोधार्थियों का महाविद्यालय की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन किया। प्रो. विनोद कुमार श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष एसेड्स एवं प्रो. जय नारायण पाण्डेय, संगोष्ठी संयोजक ने स्वागत उद्बोधन दिया। नीति आयोग के प्रोफेसर प्रो. मनमोहन कृष्णा, भूतपूर्व अध्यक्ष अर्थशास्त्र विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश द्वारा च्वॉयस आर्किटेक्चर पर विचार व्यक्त किए गए। उन्होंने विकल्प संरचना की भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रो. विनोद कुमार श्रीवास्तव एवं डॉ. सरिता द्विवेदी द्वारा रचित किताब कला शक्ति एवं डॉ. सरिता द्विवेदी द्वारा लिखित पुस्तक भारतीय समकालीन कला का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय अंबिकापुर के कुलसचिव, प्रो. शारदा प्रसाद त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में शोध के क्षेत्र में स्वयं के अनुभव साझा किए और कहा कि इस क्षेत्र में और अधिक प्रयास की आवश्यकता है, जिससे समाज के लिए अधिक से अधिक सार्थक निष्कर्ष निकाले जा सकेंगे। क्षेत्रिय अपर संचालक उच्च शिक्षा विभाग प्रो. रिजवान उल्ला ने कहा कि निरंतर नए शोध के माध्यम से ज्ञान प्राप्ति का अवसर शोधार्थियों को मिलता रहता है। किसी भी राष्ट्र की स्थिति उसके आर्थिक स्तर पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि यह सदी बाजार की सदी है, जिसमें बाजार की प्रमुखता है। बाजार एवं कंज्यूमर दोनों का सशक्त होना अति आवश्यक है। प्रो. ए.पी. पांडे, पूर्व कुलपति मणिपुर केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं प्रो. अल्पना श्रीवास्तव, एमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ ने ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर अपने अनुभवों को साझा किया। एसेड्स के ज्ञान रत्न पुरस्कार के लिए प्रो. किशन यादव, कुलपति तात्या टोपे विश्वविद्यालय गुना मध्य प्रदेश को चयनित किया गया। इनके अर्थशास्त्र में विशेष योगदान की सराहना की गई। संगोष्ठी में बहुतायत संख्या में देश-विदेश से अतिथि एवं शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक, संगोष्ठी के संयोजक प्रोफेसर जय नारायण पाण्डेय, आयोजन सचिव डॉ. रजनी सारथी, अनिशा लकड़ा एवं डॉ. अजय सिन्हा और महाविद्यालय के शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। मंच संचालन डॉ. हर्षदीप सिंह धंजल एवं डॉ. रश्मित कौर ने किया।

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