984 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने बंदूक छोड़ कलम के माध्यम से विकास की नई राह का दिया संदेश

उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 4 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने दी परीक्षा

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में 07 दिसम्बर 2025 को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत अनुशंसित उल्लास -नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत महापरीक्षा अभियान का सफल आयोजन किया गया। परीक्षा का परिणाम राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान (एनआईओएस), नई दिल्ली द्वारा घोषित किया गया, जिसमें प्रदेश के प्रतिभागियों ने उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। इस अभियान में प्रदेश में पहली बार 984 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों से भाग लेकर बंदूक छोड़ कलम के माध्यम से विकास की नई राह चुनने का संदेश दिया।
राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश भर से कुल 4 लाख 55 हजार 44 शिक्षार्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए थे, इनमें से 4 लाख 13 हजार 403 शिक्षार्थी उत्तीर्ण घोषित किए गए हैं। इसी प्रकार प्रदेश का कुल परीक्षा परिणाम 90.85 प्रतिशत रहा, जो साक्षरता अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वर्गवार परिणाम के अनुसार एक लाख 37 हजार 350 पुरुष शिक्षार्थियों में से एक लाख 23 हजार 743 उत्तीर्ण घोषित किए गए हैं। 3 लाख 17 हजार 617 महिला शिक्षार्थियों में से 2 लाख 89 हजार 597 ने सफलता प्राप्त की है। वहीं 77 ट्रांसजेंडर शिक्षार्थियों में से 63 उत्तीर्ण हुए, जो समावेशी शिक्षा की दिशा में सकारात्मक संकेत है।
इस महापरीक्षा अभियान को सफल बनाने में शासकीय एवं अशासकीय सदस्यों, जनप्रतिनिधियों तथा स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका रही। जिला एवं जनपद स्तर पर कलेक्टर एवं जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा व्यापक स्तर पर अपील, बैठकों और सोशल मीडिया के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाया गया। स्कूली छात्र-छात्राओं, पंच-सरपंचों एवं ग्राम प्रभारियों द्वारा प्रभात फेरियों का आयोजन किया गया तथा सायंकाल जनप्रतिनिधियों द्वारा मशाल रैलियां निकालकर सकारात्मक शैक्षिक वातावरण का निर्माण किया गया। जिला एवं विकासखंड स्तर पर निरंतर वेबीनार और समीक्षा बैठकों के माध्यम से दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।
इस अभियान में प्रदेश के विभिन्न जिला जेलों के लगभग 795 बंदियों ने भी परीक्षा में सम्मिलित होकर अंधकार से उजाले की ओर बढ़ने की प्रेरणादायक पहल की। 77 ट्रांसजेंडर शिक्षार्थियों ने परीक्षा में भाग लेकर आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया। दुर्ग जिले के मोहलनाय गांव की 98 वर्षीय दुधी बाई तथा जरवई के 82 वर्षीय बुजुर्ग दंपत्ति सहित अनेक वरिष्ठ नागरिकों ने परीक्षा में भाग लेकर यह सिद्ध किया कि शिक्षा की कोई आयु सीमा नहीं होती। कई स्थानों पर पति-पत्नी, देवरानी-जेठानी, दादा-पोता एवं तीन पीढ़ियों ने एक साथ परीक्षा देकर पारिवारिक सहभागिता की सुंदर मिसाल प्रस्तुत की। दिव्यांग शिक्षार्थियों की सक्रिय भागीदारी भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने उल्लास कार्यक्रम से जुड़े सभी शासकीय-अशासकीय सदस्यों, जनप्रतिनिधियों एवं स्वयंसेवकों को इस ऐतिहासिक सफलता पर हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने आगामी मार्च में आयोजित होने वाले परीक्षा अभियान में अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा कि सभी राज्यवासी मिलकर छत्तीसगढ़ को शत-प्रतिशत साक्षर राज्य बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।

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