प्लास्टिक प्रोसेसिंग इकाई का निरीक्षण कर प्रक्रिया एवं निर्मित उत्पादों की ली जानकारी

अंबिकापुर। कलेक्टर अजीत वसंत ने बुधवार को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय अग्रवाल के साथ दरिमा में प्री मैट्रिक कन्या छात्रावास एवं जिला स्तरीय प्लास्टिक प्रोसेसिंग इकाई का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में सम्बंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने प्री मैट्रिक कन्या छात्रावास पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने छात्रावास परिसर, रसोई कक्ष, शयनकक्ष का अवलोकन किया। भोजन की गुणवत्ता, साफ- सफाई, सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान रखने तथा समुचित व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने छात्राओं से सीधा संवाद करके उनकी समस्याओं एवं छात्रावास की व्यवस्थाओं पर फीडबैक लिया। उन्होंने आगामी परीक्षाओं के लिए कड़ी मेहनत कर बेहतर रिजल्ट लाने प्रोत्साहित किया। कलेक्टर ने आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त को छात्रावास में आवश्यकता अनुसार पंखे लगवाने एवं छात्राओं के लिए खेल सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
जिला स्तरीय प्लास्टिक प्रोसेसिंग इकाई का निरीक्षण करने के दौरान कलेक्टर ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) अंतर्गत कचरा कलेक्शन की प्रक्रिया, उठाव, प्रोसेसिंग, निर्मित उत्पादों की जानकारी ली तथा सेंटर के सभी इकाइयों का अवलोकन किया। उन्होंने इकाई में कार्यरत महिलाओं से चर्चा करके उनके कार्य अनुभव के बारे में पूछा तथा उन्हें प्रोत्साहित किया। निरीक्षण दौरान अधिकारियों ने बताया कि केन्द्र में एकत्रित प्लास्टिक कचरे का प्रोसेसिंग कर दाने, गट्टे एवं अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। वर्तमान में इन दानों से प्लास्टिक की रस्सी बनाने का कार्य जारी है। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक की बाल्टी एवं डस्टबिन उत्पादन की भी योजना बनाई गई है, कलेक्टर ने एमआरसी सेंटर तैयार करने जल्द आवश्यक कार्ययोजना बनाने निर्देशित किया। निरीक्षण में उन्होंने इकाई के सतत संचालन, कार्यरत कर्मचारियों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, सावधानी एवं सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

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प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।