राजस्व अधिकारियों की बैठक में कहा-लंबित राजस्व प्रकरणों का शीघ्र निराकरण
अंबिकापुर। कलेक्टर अजीत वसंत ने बुधवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में राजस्व अधिकारियों को लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम जनता से जुड़े राजस्व मामलों में संवेदनशीलता बरतें और किसी भी प्रकरण को समय-सीमा के बाहर अनावश्यक रूप से लंबित न रखें।
बैठक के दौरान कलेक्टर ने अवैध भूमि अतिक्रमण एवं कब्जा के मामलों की समीक्षा करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने तहसीलवार समीक्षा करते हुए अविवादित एवं विवादित नामांतरण, सीमांकन, बटांकन, खाता विभाजन और भू-अर्जन जैसे प्रकरणों में प्रगति लाने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने सभी एसडीएम एवं तहसीलदारों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने न्यायालयों में सुनवाई के लिए निश्चित दिवस निर्धारित करें। साथ ही, सभी प्रकरणों की ऑनलाइन प्रविष्टि समय पर सुनिश्चित करने को कहा गया ताकि पारदर्शिता बनी रहे। मतदाता सूची के एसआईआर कार्य और त्रुटि सुधार के आवेदनों का भी समय-सीमा में निराकरण करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कोटवारी भूमि को अहस्तांतरणीय दर्शाने तथा उसकी खरीदी-बिक्री पर रोक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में अपर कलेक्टर सुनील नायक, अमृतलाल ध्रुव, समस्त एसडीएम, तहसीलदार एवं राजस्व विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
मैदानी स्तर पर सक्रियता के निर्देश
प्राकृतिक आपदा सहायता के प्रकरणों पर समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि पटवारी स्वयं फील्ड में जाकर मौका मुआयना करें और दस्तावेजों को पूर्ण कर तत्काल जिला कार्यालय प्रेषित करें। उन्होंने वृक्ष कटाई के मामलों में राजस्व एवं वन विभाग की संयुक्त टीम द्वारा सर्वे कर शीघ्र निपटारा करने के निर्देश दिए गए।
छात्रों के लिए विशेष अभियान
लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत स्कूली बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनाने के कार्य में तेजी लाने हेतु विशेष अभियान चलाने पर जोर दिया गया। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि मैदानी अमला सक्रिय होकर लक्ष्य को समय पर पूरा करे।
नियमित मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग
कलेक्टर ने नक्शा बटांकन, अभिलेख शुद्धता, किसान किताब वितरण, आधार सीडिंग और वन अधिकार पट्टों के लंबित मामलों की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने सभी एसडीएम को अपने-अपने अनुविभागों में कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा प्रत्येक माह प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

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प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को आरएफएसएल की जानकारी देने हुई दो दिवसीय कार्यशाला  संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला कार्यालय के अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारीफोटो-2  छ.ग.फ्रंटलाइनअंबिकापुर। सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में व्यवहारिक प्रशिक्षण करने हेतु आये सभी नव पदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को नई तकनिकी फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण (आरएफएसएल) की जानकारी हेतु रेंज स्तर पर कार्यशाला का आयोजन पुलिस को-ऑडिनेशन सेन्टर, सरगुजा भवन में पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के निर्देशन में किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेक्टिकल प्रशिक्षण के अधिकारी आर.के. पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस नई तकनीकी प्रयोगशाला प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रकरण के विवेचना के शुरूआती दौर से ही संग्रहित किये जाने वाले साक्ष्यों को पूर्णत: पारदर्शिता के साथ सुरक्षित एकत्रित किया जाता है ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष सुरक्षित पेश किया जा सके, जो कि अपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच की महत्ता दिया गया है।रेंज स्तर पर इस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दो बैच में कराया गया। प्रथम बैच 03 जुलाई को संपन्न हुआ, जिसमें जिला सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया के 38 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण मिला। द्वितीय बैच में 07 जुलाई को सरगुजा, जशपुर एवं एमसीबी जिले के 40 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को इस प्रशिक्षण दिया गया। फोरेंसिक साइंस थ्योरी एवं प्रेटिकल प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर के अधिकारी आर. के पैकरा एवं कुलदीप कुजूर के द्वारा अपने अनुभवों को साझा करते हुये कई ऐसे पुराने प्रकरणों के बारे में बताया जो कि बहुत ही बारीकी से उन्होंने साल्व किया है। उन्होंने कहा कि आप सब जब भी मैदानी थाना, चौकी क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो अलग-अलग तरह के अनसुलझे प्रकरण आयेंगे, जैसे में बर्निंग केश, डिकम्पोज बॉडी, इलेक्ट्रिक शॉक, हैंगिंग, ड्रावनिंग, हत्या, शव निरीक्षण, घटनास्थल का निरीक्षण जैसे प्रकरणों का शुरूआती दौर से ही एक-एक साक्ष्यों का तकनीकी उपकरणों के माध्यम से सावधानी पूर्वक साक्ष्य संग्रहित करने के तरीके एवं बारीकियों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।बताया गया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुये नये अपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम में फारेंसिक जांच की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें विशेष रूप से 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक टीम के अधिकारियों के द्वारा जांच की अनिवार्यता है। इस हेतु रेंज के सभी जिलों में फारेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी पदस्थ किये गये हंै, एवं आधुनिक मोबाइल फारेंसिक वैन प्रदाय किया है। प्रशिक्षण के अगली कड़ी में सभी प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को क्षेत्रीय न्यायालयिक विधि विज्ञान प्रयोगशाला अंबिकापुर में ले जाकर बारीकी से एक-एक कर तकनीकि उपकरणों के बारे में जानकारी देकर घटना स्थल पर किस प्रकार प्रयोग/जांच किया जाना चाहिए, इन सारी तकनीकि उपकरणों के बारे में अवगत कराया गया। इसके उपरांत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में हर बिन्दुओं पर बारी-बारी से सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से उपस्थित अधिकारियों के द्वारा फीडबैक लिया गया, इस दौरान प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से एक-एक करके पुन: तकनीकी उपकरणों एवं उसके उपयोग जैसे प्रश्नों के बाद त्रुटियों में सुधार किया गया।पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं संयुक्त संचालक, क्षेत्रिय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्रिय एफएसएल से जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और बैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी जो कि न्यायिक प्रक्रिया में गति मिलेगी एवं लंबित मामलों के निपटारे में शीघ्रता आयेगी। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा अमोलक सिंह ढिल्लो, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपुत, पुमनि. कार्यालय के रीडर रेशम लाल साहू, स्थापना प्रभारी सुनील वर्मा सहित रेंज में पदस्थ सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षक उपस्थित रहे।