भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष एवं उनकी धर्मपत्नी ने अपने स्व. माता-पिता की स्मृति में पुरस्कृत छात्रों का नकद राशि देकर किया सम्मान

अंबिकापुर। भारत में क्षेत्रीय विकास मुद्दे एवं चुनौतियां विषय पर महाविद्यालय स्वशासी वित्त योजना अनुदान व छत्तीसगढ़ शासन उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय शोध एवं अध्ययन केंद्र भूगोल विभाग एवं छत्तीसगढ़ भूगोल परिषद के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का समापन हुआ। संगोष्ठी में छत्तीसगढ़ राज्य के साथ मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश, दिल्ली, झारखंड, मिजोरम, बिहार के शोधकर्ताओं का पहुंचना हुआ। संगोष्ठी में 250 से अधिक भूगोल प्राध्यापक, शोधकर्ता एवं स्नातकोत्तर छात्रों ने अपना पंजीयन कराया। इस अवसर पर प्रकाशित संक्षेपिका एवं सेवेनियर में 173 शोध पत्रों के एब्स्ट्रेक्ट का प्रकाशन हुआ। दो दिनों में कुल 8 तकनीकी सत्रों का संचालन किया गया, जिसमें देश के विख्यात भूगोल विदों के आमंत्रित व्याख्यान एवं 32 शोध पत्रों का वाचन किया गया।
आमंत्रित व्याख्यान में प्रोफेसर एससी राय दिल्ली, प्रोफेसर विशंभर प्रसाद सती मिजोरम, प्रोफेसर अजय तिवारी जबलपुर, डॉ. कावेरी दाभरकर बिलासपुर ने प्रस्तुती दी। संगोष्ठी में महत्वपूर्ण यह रहा कि शोध पत्रों के वाचन के अतिरिक्त 35 वर्ष से कम उम्र के शोध छात्रों के लिए अलग से प्रतियोगिता के रूप में शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण कराया गया। यंग ज्योग्राफर अवार्ड के लिए 8 शोध छात्रों ने सहभागिता की, इनमें से तीन बेस्ट पेपर को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार से सम्मानित करते हुए प्रमाण पत्र एवं नकद राशि दिया गया। यंग ज्योग्राफर अवार्ड के विजेता अजीत कुमार शांते रायपुर, शमलेश पोटाई कोंडागांव, असुंता खलखो दुर्ग रहे। पुरस्कार में विशिष्ट बात यह रही भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल सिन्हा एवं उनकी धर्मपत्नी उमा सिन्हा ने अपने स्व. माता-पिता की स्मृति में पुरस्कृत तीनों छात्रों को नकद राशि देकर सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त स्नातकोत्तर छात्रों के लिए विशेष थीम सस्टेनेबल डेवलपमेंट एवं नगरीय विकास पर पोस्टर कंपटीशन आयोजित किया गया, जिसमें 17 छात्रों की सहभागिता रही। इनमें से तीन बेस्ट पोस्टर को प्रमाण पत्र प्रदान करके सम्मानित किया गया। संगोष्ठी के समापन सत्र में छत्तीसगढ़ भूगोल परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर टीएल वर्मा रायपुर मुख्य अतिथि रहे, जिन्होंने विकसित भारत 2047 के थीम और उसके रोड मैप को प्रस्तुत किया। विशिष्ट अतिथि संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. एसपी त्रिपाठी ने संसाधनों के उपयोग और उनके संरक्षण से विकास प्रक्रिया को प्रभावित बताया। समापन सत्र में मिजोरम केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष वीपी सती ने अनुसंधान में आंकड़ों के संकलन, पर्यवेक्षण और उनके विश्लेषण की सूक्ष्म पद्धतियों का उल्लेख किया। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय हिमालय क्षेत्र के सूक्ष्म अनुसंधानात्मक अध्ययन में व्यतीत किया है। इस अवसर पर प्रोफेसर वीरेंद्र वर्मा, सेवानिवृत प्राचार्य एवं भूगोल वेत्ता जेपी शिवहरे, छत्तीसगढ़ भूगोल परिषद के वर्तमान प्रांतीय अध्यक्ष प्रोफेसर डीडी कश्यप, वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. कावेरी दाभडकर, डॉ. मंजू पांडे, डॉ. सरस्वती बेरवंशी, महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापकों में डॉ. जशिंता मिंज, डॉ. राजकमल मिश्रा, डॉ. एचडी महार, डॉ. एसएन पांडेय, स्वशासी प्रकोष्ठ के नियंत्रक डॉ. दीपक सिंह, डॉ. कामिनी, डॉ. पीयूष पांडे सहित छत्तीसगढ़ व सरगुजा संभाग के सभी महाविद्यालयों के भूगोल के सहायक प्राध्यापक, प्राध्यापक, महाविद्यालय के सभी विभागों के प्राध्यापकों की उपस्थिति रही। समापन सत्र का संचालन इतिहास विभाग के सहायक अध्यापक डॉ. अजय पाल सिंह ने किया। सेमिनार के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री ओमकार कुशवाहा व डॉ. राजीब जाना ने स्नातकोत्तर भूगोल के छात्रों के कार्य संयोजन को सराहा।

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