मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने 30 जून को मरीज की मौत और पैकेज लॉक होना स्पष्ट किया  

अंबिकापुर। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजनांतर्गत मरीजों के आयुष्मान पैकेज एवं उपचार पूर्ण होने के उपरांत ऑटो जनरेशन के माध्यम से संबंधित मरीज अथवा स्वजन के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर संदेश प्राप्त होने के संबंध में राजमाता श्रीमती देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय द्वारा वास्तविक तथ्यों एवं पोर्टल पर उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर जानकारी प्रस्तुत की गई है।
मामला मृत आरक्षक से जुड़ा है, जिसे इलाज के लिए 26 जून को मेडिकल कॉलेज संबंद्ध जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, इलाज के दौरान पांचवें दिन, 30 जून को उसकी मौत हो गई थी। वहीं आयुष्मान सारथी पोर्टल से मिले संदेश में मृत आरक्षक को 06 अगस्त को डिस्चार्ज होना और स्वस्थ होकर घर लौटना बताया गया। यह संदेश मोबाइल में स्वजन को मिला, तो वे भौचक रह गए, क्योंकि न सिर्फ वे उसका अंतिम संस्कार कर चुके हैं, बल्कि मृतक का अधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी हो चुका है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से मृत्यु के पूर्व इलाज में आयुष्मान से व्यय हुए पैकेज का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है, और डाटा एंट्री जैसी तकनीकी खामियों को इसकी वजह बताया गया है।  
उपचार अवधि में 16,700 रुपये का पैकेज हुआ ब्लॉक
मामले में चिकित्सालय प्रबंधन ने प्रशासन के हवाले से जानकारी दी है कि, मरीज स्व. देवनारायण राम पिता मुनेश्वर राम 39 वर्ष, निवासी जशपुर को शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय, अंबिकापुर में 26 जून को शल्य क्रिया विभाग अंतर्गत आईसीयू में भर्ती किया गया था। उपचार के दौरान 30 जून को उनकी मृत्यु हो गई। मरीज की भर्ती अवधि कुल 05 दिवस रही। इस अवधि में उपचार के लिए आईसीयू तथा ब्लड ट्रांसफ्यूजन से संबंधित पैकेज ही ब्लॉक किए गए। इन पैकेजों की कुल व्यय राशि 16,700 रुपये थी। संबंधित मरीज के आयुष्मान कार्ड खाते में 4,74,800 रुपये की राशि शेष है।
क्लेम प्रोसेसिंग में विभिन्न चरणों से गुजरती है प्रक्रिया
बताया गया कि मरीज के उपचार के दौरान आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत क्लेम प्रोसेसिंग की प्रक्रिया में विभिन्न अवसरों पर क्वेरी जनरेट होती है। चिकित्सालय द्वारा मरीज के उपचार से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेजों को पोर्टल पर क्वेरी के समाधान सहित विभिन्न चरणों में अपडेट किया जाता है। सामान्यत: इस प्रक्रिया में 8 से 10 दिन का समय लगता है। इसके पश्चात आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण कर क्लेम इनिशिएशन की कार्यवाही नियमानुसार संपादित की जाती है।
डाटा एंट्री में विलंब से 42 दिन बाद हुआ अपडेट
प्रकरण में संबंधित विभाग के डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा क्लेम की निगरानी में विलंब किया गया। इसके कारण पोर्टल पर क्लेम क्लोज की जानकारी 6 अगस्त 2026 को अपडेट हुई, जो मरीज की मृत्यु के 42 दिन बाद हुई। पोर्टल पर प्रक्रिया अपडेट होने के पश्चात संबंधित मरीज के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ऑटो जनरेटेड संदेश प्राप्त हुआ। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरीज की वास्तविक स्थिति के अनुरूप उपचार से संबंधित पैकेज ही ब्लॉक किए गए थे। इन पैकेजों की कुल राशि 16,700 रुपये थी। मरीज की मृत्यु के समय के पश्चात कोई अतिरिक्त पैकेज ब्लॉक नहीं किया गया।
ऐसे में बायोमेट्रिक एवं ओटीपी प्रक्रिया संभव नहीं
हॉस्पिटल प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मरीज की अनुपस्थिति में आवश्यक प्रक्रिया किया जाना संभव नहीं है, क्योंकि बायोमेट्रिक के लिए मरीज के अंगूठे का निशान आवश्यक होता है। इसके साथ ही मोबाइल नंबर पर ओटीपी भी भेजा जाता है। इस संबंध में संपूर्ण विवरण मरीज के आयुष्मान कार्ड से प्राप्त एवं सत्यापित किया जा सकता है।
अलग बाक्स
डिस्चार्ज, रेफरल एवं मृत्यु प्रकरणों में यथास्थिति के अनुरूप संदेश के लिए कार्रवाई
हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा बताया गया कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना अंतर्गत जिन मरीजों का आयुष्मान कार्ड ब्लॉक कर उपचार किया जाता है, उनके डिस्चार्ज, रेफरल, मृत्यु आदि प्रकरणों में मरीज की यथास्थिति के अनुरूप ही ऑटो जनरेटेड संदेश भेजे जाने के संबंध में उचित कार्रवाई के लिए राज्य नोडल एजेंसी, नवा रायपुर को भी पत्र प्रेषित किया गया है, और प्रकरण संबंधित प्रकाशित समाचार के संदर्भ में वास्तविक तथ्यों एवं पोर्टल पर उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर वस्तुस्थिति प्रस्तुत की गई है।

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