अंबिकापुर। अपराधों की गुणवत्तापूर्ण विवेचना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरगुजा पुलिस ने आज पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर में विवेचकों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में एनडीपीएस एक्ट, एससी/एसटी एक्ट, साइबर क्राइम एवं फॉरेंसिक जैसे जटिल विषयों पर केंद्रित रही। डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश अग्रवाल के दिशा-निर्देशन में हुई कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोलक सिंह ढिल्लो, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस ग्रामीण तुल सिंह पट्टावी, अतिरिक्त लोक अभियोजक नरेन्द्र पाण्डेय, नितेश चंद्र शुक्ला, मनोज तिवारी सहित जिले के समस्त थाना/चौकी प्रभारी एवं विवेचक शामिल हुए।
कार्यशाला में एनडीपीएस एक्ट पर प्रकाश डालते हुये अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोलक सिंह ढिल्लो ने कहा ‘मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई में पारंपरिक साक्ष्यों के साथ-साथ डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का अधिकतम उपयोग करें। हर प्रकरण में तकनीकी साक्ष्यों को विवेचना का अभिन्न हिस्सा बनाएं, ताकि न्यायालय में मजबूत प्रमाण पेश किए जा सकें।Ó विवेचकों को घटनास्थल की वीडियोग्राफी, टेस्टिंग किट का उपयोग, वाणिज्यिक मात्रा के अपराधों में आर्थिक अनुसंधान और पीआईटी एनडीपीएस के तहत कार्रवाई की जानकारी दी गई। वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी द्वारा मादक पदार्थों की पहचान और विवेचना में होने वाली त्रुटियों पर भी प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विवेचना की गुणवत्ता में सुधार करके दोषसिद्धि दर में प्रभावी वृद्धि करना है। अधिकारियों ने कहा कि अब अपराध विवेचना सिर्फ बयान और बरामदगी तक सीमित नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों पर आधारित होगी। जब विवेचना वैज्ञानिक होगी, तभी अपराधियों को सजा मिलेगी और पीड़ितों को न्याय मिलेगा।
एससी/एसटी एक्ट की बारीकियां  
लोक अभियोजकों ने बताया कि एससी/एसटी एक्ट के मामलों में घटनास्थल की त्वरित जांच और अधिनियम 1989 के तहत निर्धारित अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है। विवेचकों को वैज्ञानिक साक्ष्य, मौखिक गवाहों के बयान और फोरेंसिक सबूतों को अदालत में सही तरीके से पेश करने के तौर-तरीके बताए गए। साथ ही जांच में निष्पक्षता और लोक अभियोजक के साथ बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया।
साइबर क्राइम में त्वरित कार्रवाई
साइबर अपराधों में तत्काल बैंक को सूचित कर खातों से निकासी रोकने, अवैध निकासी और फंड ट्रांसफर वाले खातों का विवरण प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। विवेचकों को मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस और आईएसपी से तकनीकी जानकारी निकालने की प्रक्रिया भी बताई गई। आरोपियों पर सख्त कार्रवाई करने के तरीके समझाए गए।
फॉरेंसिक और साक्ष्य संरक्षण
फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल को सुरक्षित रखने, साक्ष्य उठाने और पैक करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया की जानकारी दी। उंगलियों के निशान खोजने, विकसित करने और डेटाबेस से मिलान करने की तकनीक बताई गई। साक्ष्यों को नष्ट या दूषित होने से बचाने और उन्हें अदालत में मान्य बनाने के लिए कानूनी प्रोटोकॉल का पालन करने का प्रशिक्षण दिया गया।

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