संघर्ष भरे जीवन में साहित्य का सफर ऐसा की तीन किताब लिख चुके हैं
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के युवाओं को युवा रत्न सम्मान से सम्मानित किया है। यह सम्मान कला और साहित्य के क्षेत्र में अलग लाग उपलब्धियों के लिए दिया गया है। प्रदेश से कुल 9 रत्नों को चयनित किया गया, इनमें से एक सरगुजा के हैं। सरगुजा का एक युवक जिसकी उम्र महज 26 वर्ष है, इसने ना सिर्फ लेखन किया, बल्कि लेखन के जरिए अपनी पहचान बनाई और छत्तीसगढ़ सरकार से सम्मान पाया है। स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ग्रुप अवार्ड के लिए 5 लाख और 8 व्यक्तिगत अवार्ड के लिए एक-एक लाख रुपये पुरस्कार की राशि दी है। इस मौके पर राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर भी उपस्थित रहे।
अमित यादव बताते हैं कि लिखने का शुरुआत उन्होंने 2017 में की, तत्समय वे 12वीं क्लास में थे। बड़े-बड़े लेखकों की रचनाओं को देखकर ही लिखने का विचार उसके मन में आया, इसके बाद वह तीन किताबें लिख डाला। अनकहे अल्फाज़, अमित हिडन वर्ड्स और मैं तुम्हें जानता हूं, के अलावा दो किताबें कंपाइल की है और 25 से अधिक किताबों का हिस्सा रह चुके हैं, जिसमें सह लेखक के तौर पर वे शामिल हैं, और अभी गीत भी लिख रहे हैं। इनके लगभग चार गीत रिलीज हो चुके हैं और भी गीत चल रहे हैं। इनका कहना है कि पहली बार छत्तीसगढ़ में सरकार युवाओं के बारे में सोच रही है। पहले ही उनके पास आया था कि छत्तीसगढ़ युवा रत्न सम्मान का आवेदन वे कर सकते हैं, जिसकी उम्र 15 वर्ष से 29 वर्ष हो। अलग-अलग 15 क्षेत्र में साहित्य का भी क्षेत्र था, इसी को आधार बनाकर उन्होंने सरगुजा के खेल युवा कल्याण विभाग में अपना फॉर्म भरा। चयन होने पर उन्हें फोन करके इसकी जानकारी दी गई और बताया गया कि रायपुर में सीएम साहब पुरस्कार देंगे। इसके बाद वे रायपुर पहुंचे और एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के हाथों पुरस्कार प्राप्त किया।
ट्रेन की जनरल बोगी में सफर करके पहुंचे
रायपुर आने का बुलावा 11 बजे युवा खेल विभाग रायपुर से मोबाइल पर कॉल के माध्यम से मिला। इसके बाद जाने का कोई साधन समझ में नहीं आ रहा था। रविवार का दिन था, तत्काल की टिकटें भी खत्म हो चुकी थी। ट्रेन से जाना ज्यादा सुविधाजनक था, पैसे भी कम लगते हैं। ऐसे में ट्रेन से जनरल बोगी में अपने पिता के साथ उन्होंने सफर तय किया। थोड़ा पहले पहुंचने से जनरल बोगी में बैठने के लिए सीट मिल गई, बाद में यहां पैर रखने तक का जगह नहीं था। भीड़ के कारण एक बार जहां बैठे थे, वहीं बैठे रह गए, इसके बाद सुबह रायपुर में उतरे। अमित यादव के पिता जल जीवन मिशन के पानी टंकी में नाइट ड्यूटी करते हैं, सुबह नल चालू करने की जिम्मेदारी निभातेे हैं। इससे लगभग 15 साल पहले उनके पिता पेंटिंग का काम करते थे। एक एक्सीडेंट के बाद वे इस काम छोड़ दिए।

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