छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड से संबद्धता के बावजूद राष्ट्रीय शिक्षा नीति से गुरेज
अंबिकापुर। शहर के कई बड़े निजी स्कूलों में पुस्तक, गणवेश सहित अन्य शैक्षणिक सामग्री की बिक्री के साथ ही भारी-भरकम फीस वसूलने जैसी खबरें आम हैं। हर वर्ष नए शैक्षणिक सत्र में निजी स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए अभिभावक संघ आगे आता है, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से निजी स्कूलों का संचालन मनमाने ढर्रे पर होते आ रहा है। पहले तो अभिभावक नामी स्कूलों में अपने बच्चे का दाखिला कराने के लिए जोड़-तोड़ लगाते हैं, इसके बाद यहां थोपे जाने वाले पुस्तकों, गणेश सहित अन्य सामग्रियों की खरीदी के बोझ तले दबते चले जाते हैं।
इसी क्रम में अंबिकापुर के सरगवां में खुले बिड़ला ओपन माइंड स्कूल ने वृहद स्कूल भवन का निर्माण करने के बाद अभिभावकों पर कुछ ऐसा बोझ डालना शुरू किया, जिसकी शिकायत पीएमओ तक पहुंची और सरगुजा जिले का शिक्षा विभाग जब जांच में जुटा तो वह भी अनियमितताओं का पचा नहीं पाया, और जिला शिक्षा अधिकारी ने एक लाख रुपये का आर्थिक दंड अधिरोपित कर दिया। साथ ही चेतावनी दी गई है कि भविष्य में यदि ऐसा दोहराया गया तो स्कूल की मान्यता समाप्त की जा सकती है। आदेश के अनुसार, अर्थदंड की राशि 3 दिन के भीतर शासन के खजाने में जमा करके इसका पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा। नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के लिए लागू निजी प्रकाशकों की किताबों पर नजर डालें तो इसकी कीमत 2946 रुपये से 7578 रुपये तक है। इसके बाद गणवेश व अन्य सामग्री का दर नर्सरी 4300 रुपये, कक्षा पहली से चौथी तक के लड़के-लड़कियों का 3100 व 3000 रुपये, कक्षा पांचवीं से 8वीं तक के बच्चों का 3700 रुपये निर्धारित है। जांच टीम ने पुस्तकों व गणवेश से संबंधित सामग्रियों का दर अत्यधिक होना पाया है। कार्रवाई की सूचना सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग, संचालक लोक शिक्षण संचालनालय, आयुक्त सरगुजा संभाग, कलेक्टर सरगुजा सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भेजी गई है।
पीएमओ में भेजे गए पत्र के बाद जांच कार्रवाई
शिकायतकर्ता राहुल अग्रवाल ने प्रधानमंत्री कार्यालय, भारत सरकार, नई दिल्ली में पंजीकृत शिकायत क्रमांक पीएमओपीजी/ई/2025/006407 के माध्यम से दर्ज कराई गई शिकायत में बताया था कि बिड़ला ओपन माइंड स्कूल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू नहीं है। सभी कक्षाओं में निजी प्रकाशकों की किताबें अनिवार्य कर दी गई हैं और अभिभावकों पर अनुचित दबाव डाला जा रहा है। स्कूल की एक पतली 24 पेज की किताब की कीमत 650 रुपये है, और पूरे सेट के लिए खरीदी को अनिवार्य कर दिया गया है। आधी किताबें या फोटो कॉपी स्वीकार नहीं की जाती है। इससे अभिभावकों को अन्य विकल्प नहीं मिलता है।
एक ही फर्म में किताब, गणवेश व अन्य सामग्री
जांच में पाया गया कि स्कूल में एससीईआरटी (नि:शुल्क छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक) और एनसीईआरटी की कोई भी पुस्तक लागू नहीं की गई है। नर्सरी से 8वीं तक सभी कक्षाओं में निजी प्रकाशकों की किताबें ही लागू की गई हैं। छात्र-छात्राओं के कौशल और गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए निजी प्रकाशन की पुस्तकें लागू किए जाने का लेख किया गया है। इसके अलावा, कक्षा नर्सरी से 7वीं तक स्कूल गणवेश और अन्य सामग्री भी केवल एक ही फर्म से उपलब्ध कराई गई है। विद्यालय के सूचना पटल पर कक्षावार पुस्तकों की सूची एवं गणवेश के नमूना का प्रकाशन प्रबंधन के द्वारा किया गया है। संस्था के द्वारा पुस्तक विक्रेताओं को पुस्तकें विक्रय करने के लिए कक्षावार पुस्तकों की सूची प्रदान किए जाने का लेख किया गया है।
छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड से संबद्धता के बाद ऐसा हाल
जांच अधिकारी ने अपने अभिमत में लेख किया है कि विद्यालय प्रबंधन के द्वारा विद्यालय का छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड से संबद्धता होने के बावजूद छत्तीसगढ़ एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू नहीं करके निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लागू करना, कक्षा नर्सरी से आठवीं तक सभी पुस्तकें, स्टेशनरी, स्कूल गणवेश केवल एक ही फर्म किताब घर, भ_ी रोड, केदारपुर अंबिकापुर में उपलब्ध होने तथा कम पृष्ठों की पुस्तकों का अधिकतम मूल्य निर्धारित करके विक्रय करना विद्यालय प्रबंधन के द्वारा अनुचित लाभ हेतु संलिप्तता को प्रदर्शित करता है। जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कक्षा पहली से चौथी तक कार्य पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी स्वीकार नहीं की जा रही है, कक्षा 5 से 8 तक फोटोकॉपी मान्य है।
चालान का मूल प्रति 3 दिन के अंदर प्रस्तुत करना होगा
कलेक्टर सरगुजा द्वारा आदेशित, जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश पत्र दिनांक 26 सितम्बर 2025 में उल्लेख है कि बिड़ला ओपन माइंड स्कूल सरगवां में अनियमितता एवं स्वेच्छाचारिता के संबंध में कार्यालयीन कारण बताओ सूचना पत्र 18 जुलाई 2025 को जारी किया गया, जिसका संतोषप्रद जवाब नहीं पाया गया। उक्त स्कूल का कृत्य अत्यंत आपत्तिजनक एवं नियमों के विपरीत है। ऐसे में बिड़ला ओपन माइंड स्कूल को एक लाख रुपये आर्थिक दंड अधिरोपित किया जाता है। चेतावनी दी जाती है कि उपरोक्त कृत्य की पुनरावृत्ति भविष्य में न किया जाए, अन्यथा संस्था की मान्यता समाप्त कर दी जाएगी। उक्त आर्थिक दंड 0202-शिक्षा खेल कला और संस्कृति 01-सामान्य शीर्ष में चालान के माध्यम से शासन के खजाने में जमा करते हुए चालान की मूल प्रति सहित पालन प्रतिवेदन 3 दिवस के अंदर प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

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