मौत के बाद एम्बुलेंस का कर्मचारी भी मानवता को शर्मशार करते ले लिया 800 रुपये
नए मेहमान के आने की राह देख रहा पूरा परिवार जच्चा-बच्चा की मौत से सदमे में
अंबिकापुर। स्वस्थ्य प्रसव के लिए तमाम सावधानी बरतने और अस्पताल लाने के बाद भी जच्चा-बच्चा की जान चली जाए, तो आरोप लगना स्वभाविक है। शासन की ओर से संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहन देने का उद्देश्य मातृ एवं शिशु के मृत्यु दर में कमी लाना है, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही कहीं-कहीं प्रसव के मामले में भारी पड़ रही है। प्रसव के लिए अस्पताल लाने के बाद 9 माह तक गर्भ में बच्चे की अटखेलियों का एहसास कर रही मां के साथ ही बच्चे का जीवन खतरे में पड़ने का ऐसा ही एक मामला सूरजपुर जिला के ग्राम पीढ़ा से सामने आया है, जिसमें स्वजन ने सूरजपुर जिला अस्पताल में जिम्मेदारों के द्वारा लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। मानवता को शर्मशार करने वाला एक और आरोप यह है कि सूरजपुर जिला अस्पताल से रिफर प्रसूता को लेकर आए एम्बुलेंस का स्टाफ 800 रुपये लेने के बाद ही रवाना हुआ। घर में नए मेहमान के आगमन की प्रतीक्षा में लगे पति को जब पत्नी के मौत की जानकारी मिली, तो वह सदमे में आ गया, वहीं गर्भवती महिला व बच्चे की मृत्यु ने पूरे परिवार को झिंझोड़कर रख दिया है।
जानकारी के मुताबिक सूरजपुर जिला के श्रीनगर, छातापारा सुरता की रेखा राजवाड़े 24 वर्ष का विवाह वर्ष 2021 में ग्राम पीढ़ा आमापारा निवासी पति तिलक राज राजवाड़े से हुआ था। दोनों के दाम्पत्य जीवन के बीच 3 साल का पुत्र है, जो सामान्य प्रसव से हुआ था। हाल में महिला 9 माह के गर्भ से थी। इसके पहले वे हमेशा चिकित्सक के संपर्क में रहे और हर माह आवश्यक जांच, उपचार करा रहे थे। 24 सितम्बर की रात प्रसव पीड़ा का एहसास होने पर स्वजन उसे करीब 11 बजे सूरजपुर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। आरोप है कि यहां आने के बाद प्रसूता को भर्ती तो कर लिया गया, लेकिन किसी चिकित्सक या नर्स ने उसे हाथ तक नहीं लगाया। मितानिन का कहना है कि गार्ड को चिकित्सक व नर्स को उठाकर बुलाने के लिए कहने पर वह बार-बार प्रसूता को जोर लगाते के लिए कहते रह गई। कहा गया जब बच्चा मुंहाने पर आएगा, तो बताना। इसी प्रयास में महिला की स्थिति गंभीर हो गई। प्रसूता की स्थिति को देखकर मितानिन ने जब जोर देकर चिकित्सक, नर्स को बुलाने के लिए कहा तो इनकी दौड़-धूप शुरू हुई। प्रसूता की स्थिति गंभीर, या कहें मौत के बाद उसे देर रात 2.30 बजे रेफर कर दिया गया। एम्बुलेंस से प्रसूता को मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर के आपातकालीन चिकित्सा परिसर में लेकर पहुंचे, यहां जांच के बाद चिकित्सक ने 3.30 बजे उसे मृत घोषित कर दिया। चिकित्सक ने बताया कि गर्भवती महिला की पहले ही मौत हो चुकी है। मामला गंभीर देखकर इसकी सूचना पुलिस सहायता केन्द्र में दी गई। गुरूवार को पुलिस ने मृतिका के शव का पोस्टमार्टम कराया है, जिसमें प्रसूता के गर्भ में पल रहे बच्चे के मृत्यु की भी पुष्टि हुई। स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने शासन स्तर पर तमाम प्रयास करने के बाद लापरवाही का आरोप और जच्चा-बच्चा की मौत से सूरजपुर जिला अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था सवालों के घेरे में है।
एंबुलेंस का कर्मचारी रुपये लेकर ही माना
मृतिका के ससुर शोभनाथ ने खुलकर मामले में सूरजपुर जिला अस्पताल के जिम्मेदारों पर लापरवाही का दोष मढ़ा है। वहीं इनका कहना है कि उनकी बहू दम तोड़ दी थी, जिससे पूरा परिवार सदमे में था। इसके बाद भी एम्बुलेंस का कर्मचारी 800 रुपये के लिए 5 बजे भोर तक डटे रहा, रुपये लेने के बाद ही वह रवाना हुआ।
इलाज के नाम पर की गई अनदेखी
मृतिका के भाई गोपाल राजवाड़े व मितानिन सुगंती राजवाड़े ने सूरजपुर जिला अस्पताल में इलाज के नाम पर पहले तो अनदेखी करने, बाद में खानापूर्ति करके रेफर करने का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि भर्ती करने के बाद 3 घंटे से अधिक प्रसूता की किसी ने सुध नहीं ली। इस बीच अचानक दर्द उमड़ा और वह बेहोश हो गई। मरनासन्न स्थिति में उसे रेफर कर दिया।
संभागीय संयुक्त संचालक ने कहा होगी जांच, कार्रवाई
संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. अनिल कुमार शुक्ला ने प्रसव पीड़िता व गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत के बाद स्वजन व मितानिन के द्वारा लगाए आरोप के सामने आने के बाद कहा है कि, सूरजपुर क्षेत्र से दोबारा ऐसी शिकायत सामने आई है। मामले की जांच के बाद दोषियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। देखना यह है कि इस मामले की कितनी पारदर्शी जांच होती है, या फिर कुछ दिनों में कार्रवाई की खानापूर्ति कर ली जाती है।

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