मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों ने इमरजेंसी ऑपरेशन करके बचाई जान
अंबिकापुर। सेंट्रल जेल में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी के गुप्तांग में पेंसिल फंसने से जीवन-मौत के बीच संघर्ष करने जैसी स्थिति बन गई। कैदी का पेट फूल गया था, और वह लहूलुहान हो गया था। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला अस्पताल के सर्जरी विभाग के संज्ञान में जब यह मामला आया, तो वे भी कैदी की स्थिति देखकर भौचक रह गए, और इमरजेंसी में सर्जरी की व्यवस्था करके कैदी की जान बचाने में भिड़ गए।
जानकारी के मुताबिक केंद्रीय जेल में निरूद्ध एक कैदी गुप्तांग में खुजली होने पर रविवार-सोमवार की रात को धागा के साथ करीब 4 सेंटीमीटर लम्बा पेंसिल डाल लिया था, जिससे उसका पेशाब रूक गया और स्थिति धीरे-धीरे खराब होने लगी। पेशाब करने में हो रही दिक्कत के साथ अन्य तकलीफ से छटपटा रहे कैदी ने इसकी जानकारी बैरक में मौजूद अन्य कैदियों को दी। खबर जेल के कर्मचारियों से प्रबंधन तक पहुंची। रात में ही कैदी को जेल के अस्पताल में लाया गया, उसकी स्थिति गंभीर देखते हुए आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जेल प्रबंधन ने उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा। यहां आपातकालीन चिकित्सा परिसर में जांच के दौरान पता चला कि कैदी के गुप्तांग से खून आ रहा है, और उसका पेट असामान्य रूप से फूल रहा है। इसकी जानकारी शल्य चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एस.पी. कुजूर को दी गई। मरीज को देखने और केस स्टडी के बाद उन्होंने तत्काल एक्स-रे सहित अन्य आवश्यक जांच कराने का निर्देश दिया। एक्स-रे कराने पर पता चला कि कैदी के गुप्तांग में धागा के साथ लम्बा पेंसिल फंसा है, जिस कारण रक्तस्राव हो रहा था। पेशाब नहीं होने से पेट फूल गया था, जिससे कैदी की स्थिति नाजुक हो गई थी। ऐसे में इमरजेंसी ऑपरेशन की तैयारी करने का निर्णय लिया, ताकि कैदी के जीवनरक्षा की पहल हो सके। चिकित्सकों की टीम ने लगभग 4 घंटे में ऑपरेशन की प्रक्रिया पूरी की और धागा के साथ 4 सेंटीमीटर लम्बा पेंसिल गुप्तांग से बाहर निकाला। ऑपरेशन के बाद पीड़ित कैदी को एक दिन सर्जिकल आईसीयू में चिकित्सकों ने अपनी निगरानी में रखा था, इसके बाद उसे जेल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। कैदी की स्थिति में सुधार बताया जा रहा है।
बन सकती थी बड़े खतरे की स्थिति
ऑपरेशन में विभागाध्यक्ष डॉ. एस.पी. कुजूर के साथ डॉ. प्रवीण सिंह, डॉ. कांता, डॉ. इन्द्रनील व निश्चेतना विभाग से डॉ. शिवम शामिल रहे। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि उनके सर्विस के दौरान ऐसा मामला पहली बार सामने आया है। गुप्तांग में पेंसिल के फंसने से आसपास के एरिया में जख्म होने और पेशाब की नली कटने जैसी संभावना बन सकती थी।
जेल अधीक्षक ने कहा
केंद्रीय जेल के अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत ने बताया कि सजायाफ्ता कैदी काफी सरल स्वभाव का है। जेल के अंदर वह नम्बरदार का काम भी करता है। ऐसे हालात क्यों बने, यह जानने के लिए उसके मानसिक स्वास्थ्य के बारे में भी परीक्षण कराया जाएगा।

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