हसदेव बचाओ संघर्ष समिति सरगुजा ने गांधी चौक में दिया धरना, सौंपा ज्ञापन
अंबिकापुर। हसदेव बचाओ संघर्ष समिति सरगुजा के द्वारा 23 सितम्बर को गांधी चौक, अंबिकापुर में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करके हसदेव अरण्य क्षेत्र में की जा रही पेड़ों की कटाई को बंद कर समस्त कोयला खनन परियोजनाओं को निरस्त करने की मांग की गई। समिति द्वारा मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम पर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया है।
प्रदेश के समृद्ध और जैव विविधता से परिपूर्ण वन क्षेत्र हसदेव अरण्य में राजस्थान राज्य विद्युत निगम लिमिटेड को तीन कोल ब्लॉक परसा ईस्ट केते बासेन, परसा एवं केंते एक्सटेंशन आबंटित है, जिन्हें अनुबंध के माध्यम से अडानी समूह को सौंप दिया गया है। इन तीनों कॉल ब्लॉक में खनन के लिए न्यूनतम 12 लाख पेड़ काटे जा रहे हैं। हसदेव क्षेत्र में कई विलुप्तप्राय, संकटपूर्ण श्रेणी की वनस्पति, वन्य जीव और पक्षी पाए जाते हैं। छत्तीसगढ़ की प्रमुख जीवनदायनी नदियां हसदेव, रिहंद एवं उनकी सहायक नदियों का यह कैचमेंट क्षेत्र है। कोयला उत्खनन से हसदेव अरण्य और संपूर्ण छत्तीसगढ़ में गंभीर पर्यावरणीय संकट की स्थिति पैदा हो गई है। खनन के कारण प्राकृतिक जल स्रोत सूख रहे हैं और नदियां प्रदूषित हो रही हैं। जंगल के विनाश से हाथियों का प्राकृतिक रहवास और उनके आने जाने का रास्ता लगातार खत्म हो रहा है, जिससे हाथी रहवासी इलाकों में आ रहे हैं। मानव हाथी संघर्ष में सैकड़ों की संख्या लोग एवं दर्जनों हाथी अपनी जान गवां चुके हैं। सबसे प्राचीन, पुरातात्विक और धार्मिक महत्व के स्थल रामगढ़ की पहाड़ी एवं प्राचीनतम नाट्यशाला पर खनन और भारी विस्फोट से अपूर्णीय क्षति पहुंच रही है। धरना को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदन में सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के सभी सदस्यों की उपस्थिति में एक अशासकीय संकल्प ‘हसदेव अरण्य क्षेत्र के सभी कोल ब्लॉक निरस्त किए जाएंÓ पारित हुआ था। भारतीय वन्य जीव संस्थान ने हसदेव की जैव विविधता अध्ययन रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि हसदेव में एक भी कोयला खदान खुलने से छत्तीसगढ़ में मानव हाथी संघर्ष की स्थिति विकराल हो जाएगी। छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जन जाति आयोग ने परसा कोल ब्लॉक की ग्रामसभाओं की जांच में पाया कि वन स्वीकृति हेतु ग्रामसभाओं के प्रस्ताव फर्जी और कूटरचित तरीके से बनाए गए थे। आयोग ने शासन को प्रेषित अपनी अनुशंसा में परसा कोल ब्लॉक को दी गई वन स्वीकृति निरस्त करने का आग्रह किया है। इन सभी तथ्यों और ग्रामीणों की ग्रामसभाओं के विरोध को कुचलकर सिर्फ एक निजी उद्योपति के मुनाफे के लिए हसदेव के जंगलों का विनाश किया जा रहा है। पूरे प्रदेश में हसदेव के विनाश के खिलाफ व्यापक जनाक्रोश है। हसदेव बचाओ संघर्ष समिति द्वारा ज्ञापन सौंपते हुए हसदेव के जंगल, जमीन, जैव विविधता और पर्यावरण को बचाने की अपील राज्य सरकार से की है और कार्रवाई नहीं होने पर व्यापक और सतत आंदोलन की घोषणा की है। इस दौरान प्रमुख रूप से भानु प्रताप सिंह, त्रिभुवन सिंह, जीडी सोड़ी, उमेश्वर सिंह आर्मो, आलोक शुक्ला, आनंद प्रकाशसहित काफी संख्या में क्षेत्र के ग्रामीण उपस्थित थे।

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