शिकायत की जांच के बजाए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर के लिए बनाया दबाव
तहसीलदार की भूमिका को संदेह के घेरे में लेते शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप
अंबिकापुर। शहर के निलेश सिंह ने जारी प्रेस नोट में उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के द्वारा 117 एकड़ भूमि पर दिए गए स्टे के बाद भी निर्माण के शिकायत की जांच करने के बजाए तहसीलदार के द्वारा उन्हें गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया है कि तहसीलदार अंबिकापुर उन्हें 30 अगस्त को दिन में 12 बजे से 3 बजे तक जांच स्थल पर उपस्थित रहने का निर्देश दिए थे, किंतु स्वयं मौके पर देर से पहुंचे और शिकायत पर गौर करने के बजाए दबाव डालकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाने का प्रयास किए। जब उन्होंने हस्ताक्षर करने से मना किया तो तहसीलदार द्वारा स्पष्ट रूप से कहा गया कि वे जांच नहीं करेंगे, और मामले को अनदेखा कर दिया गया।
निलेश सिंह का आरोप है कि तहसीलदार अंबिकापुर स्थानीय प्रभावशाली दुबे परिवार से मेल-मिलाप रखते हैं और उनके शह पर ही बार-बार जांच को गलत दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ ने 117 एकड़ भूमि पर स्टे दिया है। इस दौरान किए गए निर्माण कार्यों के जांच की मांग उन्होंने की थी। इसके बावजूद तहसीलदार द्वारा जान-बूझकर नियम विरुद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि तहसीलदार का यह आचरण न केवल पद की गरिमा के विपरीत है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया और शासन-प्रशासन की साख पर भी प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन और कलेक्टर सरगुजा से मांग की है, पूरे मामले की विशेष जांच एक उच्चस्तरीय अधिकारी के नेतृत्व में, मीडिया और शहर के गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में करवाई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं की जाती है तो वे अन्य सक्षम अधिकारियों एवं न्यायालय का दरवाजा खटखटाने विवश होंगे।

Spread the love