बलरामपुर। जिले के ग्राम चुमरा की वन भूमि कक्ष क्रमांक-पी-3461 पर अवैध अतिक्रमण और निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने मुख्य वनसंरक्षक सरगुजा को ज्ञापन सौंपकर उचित कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि कई बार को ज्ञापन सौंपकर अतिक्रमण हटाने की मांग की गई, किंतु आज तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के असगर द्वारा वन भूमि का अधिकार पत्र प्राप्त करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था। जांच के दौरान स्पष्ट हुआ कि उसके द्वारा प्रस्तुत जानकारी भ्रामक थी और वह पिछले कुछ वर्षों से ही भूमि पर काबिज हुआ है। वन परिक्षेत्र विजयनगर द्वारा 05 जनवरी 2023 को तैयार किए गए पंचनामा में उल्लेखित है कि उक्त भूमि पहले से ग्राम पंचायत द्वारा गोठान एवं आंगनबाड़ी के लिए प्रस्तावित की गई थी। इसके बावजूद अतिक्रमण न हटाकर वहां निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इतना ही नहीं, 2022 में स्वयं वन परिक्षेत्राधिकारी रामानुजगंज मौके पर पहुंचे थे और ग्रामवासियों को अतिक्रमण हटाने एवं वृक्षारोपण के साथ रोजगार दिलाने का आश्वासन दिया था, किंतु यह आश्वासन सिर्फ कागज़ों तक सीमित रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की इस उदासीनता ने अतिक्रमणकारियों का मनोबल बढ़ा दिया है। बार-बार आवेदन देने के बावजूद न तो वन मंडलाधिकारी स्तर पर कोई कार्रवाई हुई और न ही जिला प्रशासन ने इसे संज्ञान लिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि शीघ्र ही अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो वे भी वन भूमि पर कब्जा करने मजबूर होंगे, जिससे भविष्य में वन क्षेत्र में व्यापक नुकसान की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि मामले में रामानुजगंज के रेंजर की भूमिका शुरू से संदिग्ध रही है। उन्हें कई बार शिकायत किया गया, हर बार सबूत भी दिए, लेकिन उन्होंने जानबूझकर आंख मूंद लिया। ऐसा लग रहा है किसाहब की मिलीभगत से ही अवैध कब्जा हो रहा है। अगर वे चाहते तो एक दिन में कार्रवाई हो सकती थी, लेकिन वे इसे लेकर गंभीर नजर नहीं आए।

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