भैयाथान। विकासखंड के सोनपुर सहकारी समिति बंजा में इन दिनों हमाली राशि को लेकर गहमागहमी का माहौल बना हुआ है। एक ओर किसान हमाली की राशि स्वयं लेने की बात कर रहे हैं, वहीं समिति के धान खरीदी प्रभारी विवेक चौरसिया के नेतृत्व में मजदूर भी हमाली राशि की मांग कर रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि मजदूर धान बेचते समय ही किसानों से हमाली की राशि ले लेते हैं, फिर समिति से हमाली की राशि की मांग करना अनुचित है। किसानों ने यह भी कहा कि उनके फसल की लागत पहले से ही अधिक है, यही कारण है कि सरकार ने हमाली की राशि बढ़ाई है ताकि किसानों को राहत मिल सके। हमाली की राशि नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ रही है। समिति के प्रभारी का कहना है कि मजदूरों को उनके मेहनताने का उचित भुगतान मिलना चाहिए, इसके लिए हमाली राशि जरूरी है। उनका दावा है कि मजदूरों को जो राशि किसानों से मिलती है, वह पर्याप्त नहीं होती। मामले ने तूल पकड़ते हुए स्थानीय प्रशासन का ध्यान खींचा गया है। इसकी जांच हेतु गुरुवार को उपपंजीयक बजरंग पैकरा, नोडल अधिकारी संतोष जयसवाल पहुंचे। जांच दल ने मजदूरों को राशि देने का निर्देश दिया है। समिति ने 9 अस्थाई कर्मचारियों के नाम चेक भी काट दिया है। जांच दल के समक्ष किसानों ने हमाली की राशि किसानों के खाते में देने की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो वे खरीदी केंद्र का बहिष्कार करेंगे। देखना यह होगा कि प्रशासन इस विवाद का क्या समाधान निकालता है।
हमाली की राशि में हुई है वृद्धि
बीते धान खरीदी वर्ष में शासन द्वारा हमाली की राशि में वृद्धि की गई है। इसके बाद 9 रुपये के स्थान पर लगभग 17 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हमाली की राशि देना है, जो विवाद का कारण बनता नजर आ रहा है। बीते दिसंबर माह में सैकड़ों किसानों ने सहकारी समिति को ज्ञापन सौंपा था, जिसमें हमाली (मजदूरी) की राशि को सीधे किसानों के खातों में जमा कराने की मांग की गई थी। किसान लंबे समय से इस व्यवस्था में हमाली की राशि में पारदर्शिता और त्वरित भुगतान की मांग कर रहे हैं।
मेहनताना किसे मिले, सवालों के घेरे में
सोनपुर सहकारी समिति में धान खरीदी के दौरान हमाली की राशि को लेकर विवाद गरमाया हुआ है। व्यवस्था खर्च काटने के बाद जो शेष राशि बचती है, उस पर अब किसानों और हमालों दोनों का दावा है। किसानों का कहना है कि यह राशि उनके उपज से जुड़ी है, हमाली की राशि हमने दे दिया है, जबकि हमालों का तर्क है कि मेहनत उन्होंने की है, इसलिए अधिकार भी उनका बनता है। इससे मामला और उलझ गया है। सवाल यह है कि मेहनताना किसे मिले, उपज बेचने वाले किसान को या बोरियों का बोझ उठाने वाले हमाल को?
बयान
समिति के मजदूरों को भुगतान का निर्देश दिया गया है। गुरुवार को मामले की जांच हेतु वे मौके पर गए थे, लेकिन प्राधिकृत अधिकारी से मुलाकात नहीं हो पाई। बहुत जल्द मामले का निपटारा कर लिया जाएगा।
बजरंग पैकरा, प्रभारी उप पंजीयक सूरजपुर
धान खरीदी प्रभारी से मजदूरों का पूरा डिटेल मंगाया गया है। उन्होंने अभी तक पूरा डिटेल जमा नहीं किया है। वर्तमान में 09 मजदूरों का चेक काटकर भुगतान के लिए भेज दिया गया है।
दुर्गा चरण सिंह, प्राधिकृत अधिकारी, सहकारी समिति सोनपुर

Spread the love