बलरामपुर। जिले का लिब्रा कन्हर नदी अपनी नैसर्गिक सुंदरता के बीच काले कारोबार के चलते सुर्खियों में है। यहां जिले भर में रेत माफिया ने न केवल अपना शिकंजा कस लिया है, बल्कि सफेद सोना कहे जाने वाले बालू की तस्करी को खुलेआम अंजाम दे रहे हैं। अवैध रेत खनन में लगे लोग अब जान लेने पर उतारू हैं। हाल ही में इस क्षेत्र में आरक्षक शिव बच्चन की हत्या ने पूरे जिला ही नहीं पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया। इस घटना ने रेत माफियाओं की बढ़ती ताकत और पुलिस की उदासीनता को उजागर कर दिया है।
आदिवासी समाज पहुंचा मौके पर
घटना के बाद छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजुर के नेतृत्व में समाज के लोग घटनास्थल पहुंचे और ग्रामीणों से विस्तृत जानकारी ली। ग्रामीणों और सरपंच पति ने बताया कि रेत माफियाओं की गतिविधियों को लेकर कई बार पुलिस को मौखिक और लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन पुलिस महज़ औपचारिकता निभाकर लौट जाती थी।
हमारे गांव का है सफेद सोना
स्थानीय लोग कन्हर नदी के बालू को सफेद सोना कहते हैं, लेकिन रेत तस्करी ने इस अमूल्य संसाधन पर ग्रहण लगा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिदिन 200 से अधिक ट्रैक्टरों से रेत का अवैध उत्खनन होता है, और प्रशासन आंख मूंदे बैठा था जिसका खामियाजा सामने है।
समाज अध्यक्ष मिले स्वजन से
समाज के अध्यक्ष बसंत कुजूर ने आरक्षक शिवबच्चन के स्वजनों से मुलाकात करके उन्हेें आश्वस्त कराया कि छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज आपके साथ है। उन्होंने कहा पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा राशि तत्काल शासन को देना चाहिए। घटना में जिम्मेदार चाहे कोई भी हो उनके खिलाफ तत्काल एफआइआर दर्ज होना चाहिए। स्वजन इस मामले में पुलिस विभाग पर भी कई आरोप लगाते नजर आए हैं।
ट्रैक्टर पकड़े, फिर छोड़े
ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्होंने तीन ट्रैक्टरों को पकड़कर पुलिस को सौंपा था, लेकिन बाद में लेन-देन करके ट्रैक्टर छोड़ दिया गया। यह घटना रेत माफियाओं के रसूख और पुलिस पर उनके प्रभाव को उजागर करती है।
झारखंड पुलिस व राजस्व अमला भी मौजूद
इस गंभीर घटना के बाद झारखंड पुलिस और राजस्व विभाग की टीम भी  गुरुवार को मौके पर पहुंची, लेकिन जब पत्रकारों और जिला अध्यक्ष बसंत कुजुर ने सीमावर्ती इलाकों की जानकारी लेनी चाही,, तो वे गोलमोल जवाब देते हुए वहां से निकल गए।

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