पूर्व मंत्री ने कहा-मैनपाट की पहचान पर्यटन से, पहले बालको कर चुका है छल

अंबिकापुर। सरगुजा जिले की तहसील मैनपाट के ग्राम कंडराजा में मेसर्स कुदरगढ़ी स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित बाक्साइड माइन्स परियोजना के लिए आयोजित जनसुनवाई रविवार, 30 नवंबर को हुई। जनसुनवाई में लगभग 500 ग्रामीणों की उपस्थिति रही, जिनमें से 110 ग्रामीणों ने परियोजना के पक्ष एवं विपक्ष में अपने सुझाव तथा आपत्तियां प्रस्तुत की। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत भी इस जनसुनवाई में मौजूद रहे। उन्होंने कहा मैनपाट पर्यटन स्थल के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन माइनिंग गतिविधियों और बिना ग्रामीणों की सहमति के विकास के प्रयास स्वीकार्य नहीं हैं, मैनपाट का शिमला खतरे में है।
इधर जनसुनवाई पूर्व कुछ अवांछित तत्वों द्वारा ग्राम कंडराजा में एलुमिना प्लांट स्थापना का अफवाह फैलाकर माहौल को भड़काने का प्रयास किया गया और टेंट को भी नुकसान पहुंचाया गया, ऐसा प्रशासन का कहना है। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप करके ग्रामीणों को समझाइश दी, इसके बाद वातावरण शांत हुआ। निर्धारित समय 11 बजे शुरू होने वाली जनसुनवाई लगभग एक घंटे विलंब से 12 बजे शुरू हो पाई। जनसुनवाई की कार्रवाई लगभग 3 घंटे 30 मिनट तक चली, और 3.30 बजे समाप्त हुई। जनसुनवाई की अध्यक्षता अतिरिक्त अपर कलेक्टर सुनील नायक ने की। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों को बताया कि जनसुनवाई में प्राप्त सभी सुझावों एवं आपत्तियों पर पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा विस्तृत विचार-विमर्श के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सत्र के अंत में उन्होंने जनसुनवाई को शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न कराने में सहयोग के लिए सभी ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया।
जनसुनवाई में परियोजना ने प्रस्तुत किया विवरण
परियोजना प्रस्तावक कंपनी ने जनसुनवाई में बताया कि ग्राम कंडराजा में कुल 135.223 हेक्टेयर क्षेत्र में बाक्साईट खनन प्रस्तावित है, जिसमें राजस्व वन 8.111 हेक्टेयर, आरक्षित एवं संरक्षित वन 114.528 हेक्टेयर, निजी भूमि 12.584 हेक्टेयर (लगभग 31.08 एकड़) है। कंपनी के अनुसार खदान से प्रतिवर्ष अधिकतम 80,700 मीट्रिक टन बाक्साईड का उत्खनन किया जाएगा। खनन की अधिकतम गहराई केवल 9.30 मीटर रहेगी, जिससे क्षेत्र के 15 मीटर गहरे भू-जल स्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। कंपनी ने स्पष्ट किया कि परियोजना से किसी भी परिवार का विस्थापन नहीं होगा। केवल 12.584 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित होगी। भूमि का जबरन अधिग्रहण नहीं होगा। भू-स्वामियों से आपसी सहमति से मुआवजा निर्धारित किया जाएगा। खनन पूर्ण होने के बाद भूमि को समतल कर पुन: भू-स्वामी को लौटाया जाएगा। भूमि का स्वामित्व हर परिस्थिति में मूल भू-स्वामी का ही रहेगा।

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