सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय में संविधान दिवस पर विविध आयोज
अंबिकापुर। सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय सुभाषनगर में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई अंतर्गत संविधान दिवस का आयोजन किया गया। इस मौके पर बी.एड तृतीय सेमेस्टर के प्रशिक्षणार्थियों ने विभिन्न विद्यालयों में संविधान दिवस मनाया और एक साथ शपथ लिया। प्रशिक्षणार्थियों के द्वारा संविधान दिवस पर भाषण एवं कविता की प्रस्तुती दी गई।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रद्धा मिश्रा ने कहा कि 26 नवंबर 1949 वह ऐतिहासिक दिन था, जब भारत की संविधान सभा ने हमारे देश के संविधान को अपनाया। यह संविधान सिर्फ कानून की पुस्तक नहीं, बल्कि हमारे अधिकारों, कर्तव्यों, स्वतंत्रता और न्याय की रक्षा करने वाला पवित्र दस्तावेज है। संविधान ने हमें समानता, स्वतंत्रता, न्याय, और बंधुता जैसे मूलभूत मूल्य दिए हैं, यही मूल्य हमें एक मजबूत, समावेशी और एकजुट भारत बनाने की प्रेरणा देते हैं। संविधान की रचना में डॉ. भीमराव अम्बेडकर का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने इसे विश्व का सबसे विस्तृत और मजबूत संविधान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नागरिक के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम कानून का सम्मान करें, देश की एकता बनाए रखें और समाज में सद्भाव फैलाएं। अंत में उन्होंने कहा कि संविधान हमें सिर्फ अधिकार ही नहीं देता, बल्कि एक आदर्श नागरिक बनने की भी प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में के विभागाध्यक्ष रानी रजक, सहायक प्राध्यापक उर्मिला यादव, प्रियलता जायसवाल, मिथलेश कुमार गुर्जर, सुप्रिया सिंह, सविता यादव, सीमा बंजारे, अर्चना सोनवानी एवं बीएड प्रथम सेमेस्टर के प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति रही।  
बाक्स
संविधान के सिद्धांतों को व्यवहार में अपनाकर बन सकते हैं जागरूक नागरिक

सरस्वती महाविद्यालय में संविधान दिवस पर प्राचार्य ऋषि सिंह एवं नेप प्रभारी प्रवीण शर्मा द्वारा भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित किया गया। सभी ने संविधान की मूल भावना, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों को स्मरण किया। प्राचार्य ऋषि सिंह ने अपने संबोधन में संविधान को देश की आत्मा बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को इसके सिद्धांतों को व्यवहार में अपनाते हुए जागरूक नागरिक के रूप में आगे बढ़ना चाहिए। प्रवीण शर्मा ने संविधान और शिक्षा के बीच गहरे संबंध पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा नेप 2020 के माध्यम से शिक्षा में आए सकारात्मक परिवर्तनों पर चर्चा की। कार्यक्रम का संयोजन और संचालन मलय दास ने किया। इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक समीक्षा शर्मा, धनकुवर पैकरा, प्राध्यापक अभिनेश चौधरी ने भी संविधान की प्रासंगिकता, समानता, स्वतंत्रता और न्याय के मूल्यों पर अपने विचार साझा किए। अंत में सभी शिक्षकों एवं छात्रों ने मिलकर संविधान की शपथ ली और देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मर्यादा को बनाए रखने का संकल्प लिया।

Spread the love