0 यूके लिप्ट्स की आड़ में अवैध रूप से काट कर ले जा रहे बेशकीमती लकड़ियां

सूरजपुर। जिले की हरियाली को उजाड़ने के लिए बड़े पैमाने पर यूपी के लकड़ी तस्कर पिछले 1 वर्ष से सक्रिय है। जिम्मेदारों से सांठ गांठ कर हरियाली के दुश्मन ये तस्कर  यूकेलिप्टस की आड़ में आम, कदम, सेमर, जैसे न जाने कितने प्रजाति के हरे भरे वृक्षों को काटकर यहां से ले जा रहे हैं। अवैध तस्करी का यह खेल खुलेआम जिला मुख्यालय सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बेख़ौफ़ चल रहा है। जिले भर से काटे गये लकड़ियों को बिना नंबर वाले  ट्रैक्टरों से परिवहन कर जिला मुख्यालय लाया जाता है जहां कई जगहों पर अवैध ढंग से बिना अनुमति भंडारण किया गया है, और इन्हीं जगहों से ट्रैकों में लोड कर दूसरे राज्यों में भेजे जाने का धंधा किया जा रहा है।   इन्हें रोकने का आम लोगो द्वारा प्रयास किया गया परंतु अवैध रूप से लकड़ी कटाई एवं परिवहन को रोकने की जिस विभाग को जिम्मेदारी है और जिसके लिए सरकार उन्हें महीने की पगार देती है ऐसे जिम्मेदारों की चुप्पी समझ से परे है।  कथित तौर पर एक बड़े पार्टी के कुछ नेताओं की मिलीभगत होने की बात आम जनमानस के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

हालांकि पर्यावरणीय नुकसान एवं जिले से हरियाली को दूर होता देख व्याकुल होकर सोमवार को भाजपा के एक कार्यकर्ता संजय गुप्ता ने हिम्मत जुटाई और पार्टी के नेता राजेश्वर तिवारी के साथ अवैध भंडारण वाले जगह पर इस गोरख धंधे को उजागर करने हरियाली के दुश्मनों के बीच पहुंच गए। जहां से क्षेत्र के बड़े जनप्रतिनिधियों को फोन के माध्यम से जानकारी दी जिसके बाद तत्काल राजस्व विभाग के तरफ से नायब तहसीलदार मोहम्मद इसराइल खान एवं  वन परिक्षेत्र अधिकारी उमेश वस्त्रकार मौके पर पहुंचे, और कुछ देर तक बड़े पैमाने पर एकत्रित कई प्रजातियों के काटे गए लकड़ियों, बिना नंबर वाले ट्रैक्टरों से अनलोड हो रहे लट्ठों ,सहित दूसरे राज्य भेजने के लिए लोड किया जा रहे ट्रैकों को देखते रहे। फिर थोड़ी ही देर बाद अधिकारिद्व्य बगैर किसी कार्रवाई बैरंग वापस लौट गए। दोनों अधिकारियों से मोबाईल पर संपर्क की गई तो दोनों ने एक दूसरे को कार्रवाई के लिए जिम्मेदार बताते हुए अपना अपना पल्ला झाड़ लिया। सूत्रों के मुताबिक भंडारण वाले जगह पर खलबली तब मच गई जब माफियाओं ने जिले के कुछ बड़े  नेताओं एवं अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त होने की बात कही।  क्या, वन विभाग इतने बड़े स्तर पर भंडारण की अनुमति दी है अगर नहीं दी तो एक बड़े कार्रवाई को अंजाम देने के बजाय बदनामी क्यों सह रही है इसको समझा जा सकता है।  इतना ही नहीं जिले में आम जनता के विरुद्ध रेता ढो रहे ट्रैक्टरों से लेकर शराब पीकर वाहन चलाने वालों के ऊपर भी  जुर्माना किया जाता है और दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ तक का सफर तय कर पहुंचे जर्जर  बिना नंबर वाले ट्रैक्टरों को सड़क पर चलने की अनुमति खुलेआम दी जा रही है इन पर कभी कभार जुर्माना के रूप में हजार पंद्रह सौ रुए लेकर आसानी से छोड़ दिया जाता है। आखिर अपने ही जिले में अपनों से जिला प्रशासन का सौतेला व्यवहार समझ से परे है।

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