निजी अस्पताल से डिस्चार्ज करने के बाद आरोपी को पुलिस लेकर पहुंची थी जेल
अंबिकापुर। केंद्रीय जेल परिसर में पुलिस कस्टडी में जेल दाखिल होने पहुंचे आरोपी अंश पंडित उर्फ जय आदित्य तिवारी को मोबाइल सुविधा उपलब्ध कराने के मामले में कार्रवाई पुलिस अधीक्षक ने 3 पुलिस आरक्षकों को निलंबित कर दिया है। सेंट्रल जेल परिसर में जिला बदर के आरोपी और आदतन बदमाश का मोबाइल से बात करते वीडियो वायरल हुआ था। मामला सुर्खियों में आने के बाद जेल अधीक्षक ने पुलिस अधीक्षक सरगुजा को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि नव प्रवेश बंदियों को जेल प्रवेश कराते समय पुलिस कर्मचारियों के द्वारा नियमों की अनदेखी की जाती है। प्रतिबंधित क्षेत्र की श्रेणी में आने वाले जेल परिसर में मोबाइल एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक गजट का उपयोग प्रतिबंधित है, इसकी पुलिस कर्मचारियों द्वारा हिदायत देने के वावजूद अवहेलना की जाती है। उन्होंने पुलिस कर्मचारियों को जेल परिसर में इस तरह के अवैध गतिविधियों का संचालन नहीं करने की सख्त हिदायत देने का आग्रह किया था। इसे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल ने गंभीरता से लिया था।
बता दें कोतवाली थाना अंबिकापुर के अपराध क्रमांक 781/2025 धारा 296, 351 (3), 115(2), 331(6), 191(1) बीएनएस के आरोपी जय आदित्य तिवारी उर्फ अंश पंडित पिता अशोक कुमार तिवारी निवासी जरहागढ़ को 23.10.2025 को जीवन ज्योति अस्पताल अंबिकापुर से इलाज पश्चात डिस्चार्ज करने पर गिरफ्तार करने के बाद, रिमांड तैयार कर न्यायालय में पेश किया गया था। उक्त आरोपी की सुरक्षा ड्युटी हेतु थाना अंबिकापुर में तैनात आरक्षक परवेज फिरदौसी, आरक्षक डाक्टर सिंह सिदार, आरक्षक सुशील खेस का ड्युटी लगाया गया था। जेल के बाहर आरोपी जय आदित्य तिवारी उर्फ अंश पंडित द्वारा मोबाइल से बात करने का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने जांच के आदेश दिए थे। प्रथम दृष्टया विडियो में थाना अंबिकापुर से ड्युटी में तैनात आरक्षकों की लापरवाही सामने आई, जिस कारण आरोपी के द्वारा जेल परिसर में बेखौफ होकर मोबाइल में बातचीत किया गया। ड्युटी में तैनात आरक्षकों ने आरोपी को मोबाइल पर बात करने से न ही रोका गया और न ही मोबाइल को छीना गया, जिसे कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता एवं संदिग्ध आचरण मानते हुए तीनों आरक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केन्द्र अंबिकापुर में संबद्ध किया गया है। निलंबन अवधि में इन्हे नियमानुसार गुजारा भत्ता देय होगा।

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