डुमरिया घाट बनेगा श्रद्धा और आस्था का संगम: जरही में आज होगी भव्य गंगा आरती, बनारस के प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट के पुरोहित करेंगे शिरकत, छठ पूजा का तीसरा दिन डूबते सूर्य को समर्पित होगा अर्घ्य

जरही। छत्तीसगढ़ में लोक आस्था के महापर्व छठ का आज तीसरा दिन है — संध्या अर्घ्य का दिन। इस अवसर पर सूरजपुर जिले के नगर पंचायत जरही के डुमरिया घाट पर इस बार का नजारा कुछ अलग और भव्य होने जा रहा है। यहां पहली बार बनारस के प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट के पुरोहित विशेष रूप से आमंत्रित किए गए हैं, जो अयोध्या और वाराणसी की तर्ज पर गंगा आरती का आयोजन करेंगे।

नगर पंचायत जरही के इस ऐतिहासिक घाट पर आज का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और भारतीय परंपरा का अद्भुत संगम पेश करेगा। घाट को हजारों दीपों से सजाया गया है, जगह-जगह रंग-बिरंगी लाइटें टिमटिमा रही हैं, और माहौल भक्तिरस से सराबोर है।

 आस्था का सागर उमड़ेगा डुमरिया घाट पर

कहा जाता है कि आस्था का कोई रूप नहीं होता — यह केवल भावना होती है। इसी भावना के साथ जरही के डुमरिया घाट पर हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं।

इस वर्ष छठ पूजा समिति जरही द्वारा घाट को पूर्णत: सुसज्जित किया गया है। सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चेंजिंग रूम, मेडिकल टीम, और जल व्यवस्था के साथ नगर पंचायत ने उत्कृष्ट तैयारी की है।

छठ पूजा समिति जरही अध्यक्ष दिवाकर सिंह ने बताया कि डुमरिया घाट को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में यह सूरजपुर जिले की पहचान बने।

 भक्ति जागरण से आरंभ, गंगा आरती और आतिशबाजी से समापन

आज शाम 4 बजे से भक्ति जागरण का कार्यक्रम प्रारंभ होगा, जिसमें स्थानीय और बाहरी कलाकार मंच पर भक्ति गीतों की प्रस्तुति देंगे।

भजन-संध्या के बाद सूर्यास्त के समय बनारस से आए पुरोहितों द्वारा मंत्रोच्चारण के बीच गंगा आरती का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान पूरा घाट घंटों, शंखों और दीपों की लौ से गुंजायमान होगा।

रात्रि में आतिशबाजी से आकाश झिलमिला उठेगा — मानो स्वयं देवता इस पावन क्षण के साक्षी बन रहे हों।

 संध्या अर्घ्य का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

आज 27 अक्टूबर 2025 को व्रती महिलाएं डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगी।

सूर्यास्त का शुभ समय शाम 05:40 बजे है। इस दौरान महिलाएं जल में खड़ी होकर सूर्यदेव से परिवार की सुख-समृद्धि और निरोगी जीवन की कामना करेंगी।

छठ पर्व के तीसरे दिन यानी संध्या अर्घ्य के अवसर पर लोग सुबह से ही पूजा की तैयारी में लग जाते हैं। ठेकुआ, चावल के लड्डू, और फल-फूलों से पूजा की थाल सजाई जाती है। बांस की टोकरी और सूप में नारियल व पांच प्रकार के फल रखे जाते हैं, जिन्हें सूर्य देव को अर्पित किया जाता है।

 अयोध्या की तर्ज पर होगी गंगा आरती

जरही के डुमरिया घाट पर होने वाली गंगा आरती इस बार विशेष होने जा रही है।

वाराणसी के दशाश्वमेध घाट के पुरोहितों की टोली पारंपरिक वेशभूषा में दीप आराधना करेंगे। मंत्रोच्चारण, शंख ध्वनि और ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच जब गंगा आरती की लौ लहराएगी, तब घाट पर एक दिव्य आलोक फैलेगा — जो भक्तों के हृदय में भक्ति का संचार करेगा।

छत्तीसगढ़ में यह पहला मौका होगा जब किसी नगर पंचायत स्तर पर बनारस शैली की गंगा आरती आयोजित की जा रही है।

 छठ पूजा समिति जरही में पूरे, भक्तों में उत्साह चरम पर

छठ पूजा समिति जरही द्वारा घाट की साफ-सफाई, सजावट और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है।

छठ पूजा समिति जरही अध्यक्ष दिवाकर सिंह,छठ पूजा समिति जरही टीम, और स्थानीय युवा स्वयंसेवक लगातार कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहकर तैयारी में जुटे हैं।

घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए लाइटिंग, बैठने की व्यवस्था, पेयजल, और प्राथमिक चिकित्सा केंद्र की भी व्यवस्था की गई है।

 आस्था का अद्भुत नजारा देखने उमड़ रही भीड़

जरही, भटगांव, प्रतापपुर, सोनगरा, गंगापुर और आसपास के गांवों से श्रद्धालु सुबह से ही घाट की ओर आने लगे हैं।

घाट पर दीपों की कतारें, फूलों से सजी टोकरी, बच्चों की मुस्कुराहट और ढोलक की थाप से वातावरण पूरी तरह धार्मिक रंग में रंग गया है।

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