जेल मुख्यालय ने दी मंजूरी, जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जेल प्रशासन ने की सख्त कार्रवाई
फोटो-केंद्रीय जेल

अंबिकापुर। सेंट्रल जेल अंबिकापुर में हत्या के मामले में सजायाफ्ता काट रहे कैदी के मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जेल वार्ड से फरार होने की घटना के बाद जेल प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए जेल में पदस्थ 4 प्रहरियों को गंभीर लापरवाही का दोषी पाया और इन्हें भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 के तहत सेवा से पदच्युत कर दिया है।
बता दें कि मस्तूरी बिलासपुर के ग्राम मल्हार निवासी मुकेश कांत पिता हरप्रसाद 41 वर्ष, हत्या के मामले में सजायाफ्ता कैदी है, जिसे अवांछनीय गतिविधियों के कारण बिलासपुर जेल से केंद्रीय जेल अंबिकापुर में करीब ढाई वर्ष पूर्व शिफ्ट किया गया था। स्वास्थ्य खराब होने पर उसे 4 अक्टूबर को मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जेल वार्ड में जेल चिकित्सक के निर्देश पर अग्रिम उपचार के लिए भर्ती किया गया था। जेल वार्ड में पहरा दे रहे पुलिस के जवान से अनुमति लेकर वह सोमवार, 6 अक्टूबर को सुबह करीब 6.30 बजे शौचालय गया। इस दौरान पुलिस कर्मी जेल वार्ड के पिछले गेट में खड़ा होकर उसके आने की राह देख रहा था। इसी बीच वह जेल वार्ड के अंदर गया, इधर कैदी शौचालय से बाहर निकलकर फरार हो गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए जेल मुख्यालय ने जांच अधिकारी नियुक्त किया था, इसके बाद मामले की गहन जांच शुरू की गई। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में सामने आया कि जेल सुरक्षा में गंभीर चूक हुई थी। इसके बाद केन्द्रीय जेल अंबिकापुर में पदस्थ जेल प्रहरी नीलेश केरकेट्टा, लोकेश टोप्पो, ललईराम और चंद्र प्रकाश को दोषी मानते हुए जेल अधीक्षक ने चारों को अनुच्छेद 311 के तहत बर्खास्त करने की कार्रवाई की, जिसे जेल मुख्यालय रायपुर ने मंजूरी दे दी है। इसके पहले केंद्रीय जेल दुर्ग में पदस्थ जेल प्रहरी दिवाकर सिंह और केंद्रीय जेल बिलासपुर में पदस्थ प्रहरी समीर रौतिया के खिलाफ भी विभागीय जांच की गई थी। दोनों पर ड्यूटी में लापरवाही का आरोप सिद्ध हुआ। इस पर पुलिस की वैधानिक कार्रवाई के साथ जेल प्रशासन ने विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है।

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