मामला मेडिकल कॉलेज अस्पताल का, रविवार को अपरान्ह 3 बजे रिफर हुआ था मरीज
अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज अस्पताल से रिफर विशेष पिछड़ी जनजाति, पहाड़ी कोरवा परिवार के मरीज को ले जाने के लिए एम्बुलेंस की सुविधा मिलने में 25 घंटे लग गए। एम्बुलेंस का इंतजार पहाड़ी कोरवा परिवार के सदस्य रविवार को दोपहर 3 बजे से ही कर रहे थे।
जानकारी के मुताबिक बलरामपुर जिला के बरियो मदनेश्वरपुर का गुड्डू पहाड़ी कोरवा पिता छेरतू 32 वर्ष, 4 अक्टूबर को अपने साथी के साथ मोटरसायकल में ग्राम घटगांव गया था। इस दौरान जर्जर सड़क मार्ग में गड्ढे में दोपहिया वाहन का चक्का जाने से अनियंत्रित होकर गिर गया था, जिसमें उसे सिर में गंभीर चोटें आई थी। स्वजन घायल गुड्डू को मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर लेकर पहुंचे थे, यहां आवश्यक उपचार सुविधा उपलब्ध कराने के बाद चिकित्सक ने घायल को हायर सेंटर रायपुर ले जाने की सलाह दी थी, और उसे रविवार को अपरान्ह करीब 3 बजे रिफर कर दिया था। इसके बाद घायल के स्वजन एम्बुलेंस के लिए टकटकी लगाए बैठे थे। घंटों बीतने के बाद भी जब एम्बुलेंस की सुविधा नहीं मिली, तो वे अपने स्तर पर अस्पताल में कई लोगों से संपर्क किए, लेकिन इन्हें पूरी रात और सोमवार को अपरान्ह 3 बजे के बाद तक एम्बुलेंस की सुविधा नहीं मिल पाई। रविवार से ही इन्हें कभी शाम तो कभी रात 11 बजे तक, फिर अगले दिन दोपहर 12 बजे तक, पुन: अपरान्ह 3 बजे तक एम्बुलेंस मिलने के लिए आश्वस्त किया जा रहा था, तब कहीं जाकर करीब 4 बजे इन्हें मरीज को ले जाने के लिए एम्बुलेंस की सुविधा मिल पाई। इसका कारण जिले में व्हीआईपी के आगमन दौरान प्रोटोकॉल के अनुरूप एम्बुलेंस का रिजर्व होना बताया जा रहा था। बहरहाल सोमवार को 25 घंटे के अंतराल में एम्बुलेंस की सुविधा मिलने पर पीड़ित के स्वजन ने राहत की सांस ली, लेकिन जिस प्रकार विशेष पिछड़ी जनजाति, पहाड़ी कोरवा समुदाय के रिफर मरीज को हायर सेंटर भेजने के पूर्व तक स्थिति सामने आई, इससे सरगुजा संभाग के सबसे बड़े शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध जिला अस्पताल में जिम्मेदारों की बड़ी लापरवाही सामने आई है।

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