पक्षकार सहित अन्य घायल, मेंटनेंस की ओर ध्यान नहीं देने से भवन की स्थिति खराब
मौके पर पहुंचे लोक निर्माण विभाग के एसडीओ, इंजीनियर सहित अन्य अधिकारी
अंबिकापुर। शहर के कलेक्टोरेट परिसर में स्थित कुटुम्ब न्यायालय में उस समय अफरा-तफरी की स्थिति बन गई, जब प्रथम तल का छज्जा भरभराकर गिर गया। इस दौरान हुई तेज आवाज और भवन में आई कंपन का एहसास होने पर अंदर मौजूद अधीक्षक सहित अन्य कर्मचारी दहशत में आ गए और भूकम्प की संभावना पर बिना जूता-चप्पल पहने बाहर दौड़ लगा दिए। घटना में अधिवक्ता सहित अन्य लोगों के घायल होने की खबर है। घायलों में से एक को एम्बुलेंस से मेडिकल कॉलेज अस्पताल रवाना किया गया।
जानकारी के मुताबिक रविवार को अवकाश के बाद, सोमवार को रोजाना की भांति कुटुम्ब न्यायालय का संचालन हो रहा था। दोपहर करीब 12.30 से 01 बजे के बीच अचानक तेज आवाज को सुनकर यहां काम कर रहे कर्मचारी दहशत में आ गए। कुटुम्ब न्यायालय में पारिवारिक विवादों के निपटारा के लिए पहुंचे पक्षकार व कई अधिवक्ता बाहर ही खड़े थे, जो कुछ समझ पाते, इसके पहले न्यायालय भवन के ऊपरी हिस्से से छज्जा का बड़ा हिस्सा भरभराकर गिरने लगा, जिससे वे धूल-धुसरित हो गए। कुछ लोगों के ऊपर छज्जा का बड़ा टुकड़ा गिरा, जिसकी चपेट में आकर कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। गनीमत है कि अधिकांश लोग कुटुम्ब न्यायालय में वाहन खड़ा करने के लिए बने पोर्च में मौजूद थे, जिस कारण उन्हें मामूली चोट आई है। स्थिति यह थी कि पोर्च में खड़ी कुटुम्ब न्यायालय के न्यायाधीश के वाहन के ऊपर और मुख्य प्रवेश द्वार तक धराशाई हुए छज्जा का मलबा आकर गिरा था। इस दौरान बड़ी जनहानि की स्थिति भी बन सकती थी।
21 अप्रैल 2012 को हुआ था भव्य लोकार्पण
कुटुम्ब न्यायालय सरगुजा, अंबिकापुर को नवनिर्मित भवन वर्ष 2012 में हैंडओवर किया गया था। भवन के मेंटनेंस की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग की थी, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं देने से भवन धीरे-धीरे जर्जर होने की स्थिति में पहुंच गया। नवनिर्मित भवन का लोकार्पण छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आई.एम. कुद्दुसी, न्यायमूर्ति सुनील कुमार सिन्हा व न्यायमूर्ति नवल किशोर अग्रवाल ने 21 अप्रैल 2012, दिन शनिवार को किया था। भवन के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं देने से खतरे के बीच न्यायालयीन कार्य का संपादन होते आ रहा है, जिसका खामियाजा सोमवार को कुछ पक्षकारों सहित अन्य को भुगतना पड़ा। कुटुम्ब न्यायालय भवन का छज्जा गिरने की के बाद मौके पर काफी संख्या में अधिवक्ता सहित न्यायालय में आने-जाने लोग जमा हो गए। बड़ी घटना टलने से सभी ने राहत की सांस ली।
घटना के समय न्यायालयीन कार्य में व्यस्त थे
कुटुम्ब न्यायालय के प्रशासनिक अधिकारी विजय पाण्डेय ने बताया कि सोमवार को न्यायालयीन कार्य सम्पादित करने में सभी लगे थे, इसी बीच दोपहर में आई तेज आवाज के बाद भवन में कम्पन की स्थिति बनी और सभी अपने कक्ष से निकलकर बाहर की ओर भागने लगे। बाहर आने पर नजारा ही कुछ और था। भवन के ऊपरी हिस्से से छज्जा का बड़ा-बड़ा टुकड़ा, ईंट, मलबा गिर रहा था, जिस कारण तत्काल भवन से बाहर निकलकर जाना भी संभव नहीं था। बड़े हादसे की संभावना बनी थी, जो छज्जा गिरने के साथ फिलहाल टल गई। घटना में कुछ लोगों को सामान्य और अधिक चोटें आई हैं। कुछ घायलों को अस्पताल भेजा गया है।
13 साल में 12 बार से अधिक किया पत्रचार
कुटुम्ब न्यायालय के लेखापाल वशिष्ट लाल गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2012 में न्यायालय भवन के हैंडओवर होने के बाद वर्ष 2017 से अब तक लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदारों को भवन के मेंटनेंस कार्य की ओर ध्यान दिलाना शुरू कर दिया गया था। इनका ध्यान न्यायालय भवन के छत में ढलान सही नहीं होने के कारण जमा होने वाले पानी की ओर भी दिलाया गया था, जिस कारण छत और दीवारों में सीपेज की स्थिति बारिश के समय बनती आ रही है। चालू वर्ष में मई 2025 को कार्यपालन अभियंता लोक निर्माण विभाग का पुन: ध्यानाकर्षण न्यायालय भवन के मरम्मत के लिए कराया गया था। बीच में पोर्च के छत का प्लास्टर गिरने की स्थिति बनी थी, इसके बाद मरम्मत के नाम पर प्लास्टर करने की खानापूर्ति की गई। भवन को हैंडओवर करने के 5 वर्ष बाद से अब तक मेंटनेंस कार्य के लिए लिखित में लोनिवि से एक दर्जन से अधिक पत्राचार किया गया है।
उच्च न्यायालय बिलासपुर को दी जानकारी
कुटुम्ब न्यायालय के भवन में सोमवार को बनी स्थिति की जानकारी उच्च न्यायालय बिलासपुर को दी गई है। मामले को लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के संज्ञान में भी लाया गया है। इसके बाद दोपहर करीब 2.30 बजे लोनिवि के इंजीनियर मौके पर पहुंचे। इनके द्वारा भवन की स्थिति को लेकर किसी प्रकार की टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया गया। इनका कहना था कि अनुविभागीय अधिकारी को घटनाक्रम से अवगत कराया गया है, वे भवन की स्थिति का जायजा लेने आ रहे हैं। बहरहाल महज 13 वर्ष पूर्व बने भवन में 5 साल के अंतराल में जर्जर स्थिति का सामने आना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है।

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