प्रशासन की हिदायत बेअसर, गलियों तक गौवंश के विचरण से घरों की दहलीज तक सुरक्षित नहीं
अंबिकापुर। पालतू पशुओं को बांधकर नहीं रखने पर सजा, जुर्माना और पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई के फरमान के बाद भी पशु पालकों की मनमानी पर विराम नहीं लग पाया है, जबकि तत्संबंध में जिला और पुलिस प्रशासन की ओर से सख्त आदेश, निर्देश जारी कर दिए गए हैं। शहर के मुख्य मार्गों में तो पालतू मवेशी नजर आ ही जाएंगे, गलियों तक पशुओं की भरमार देखने को मिल जाएगी। शहर के गोधनपुर, फुंदुरडिहारी इलाके में तो जैसे मवेशियों को पालने का शौक रखने वालों को अपने पालतू गौ वंश से कोई लेना-देना ही नहीं है। छोटे बच्चों के साथ गौ वंश बीच सड़क या किसी के घर की दहलीज पर बैठे नजर आ जाएंगे। अगर कोई वाहन चालक इनके चपेट में आ जाए, तो इन मवेशियों के प्रति इनकी ममता जाग उठेगी, भौंहे तन जाएंगी। बरसात के मौसम में मवेशियों को खुले में छोड़ देने के कारण हालात ऐसे हैं, कि कई घरों के छज्जा के आड़ में पानी से बचने के लिए एकत्र होने वाले गौ वंशों के कारण घर में रहने वाले लोगों का आना-जाना दूभर हो गया है। मवेशी पालक तो चैन की नींद ले रहे हंै, संबंधित घर के लोगों को कई प्रकार की दुविधाजनक परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है। गोबर से घरों का दहलीज पटा हुआ रहता है। इन मवेशियों के कारण नए घरों के दीवारों की स्थिति कुछ ऐसी है, जैसे वर्षों पुराना मकान हो। पीड़ित जनता ऐसे में सवाल उठा रही है कि, साहब कब होगी मवेशी पालकों पर कार्रवाई, या कागज में ही आदेश का पालन कराया जाएगा।
प्रशासन का आदेश तो सख्त, लेकिन पालन नहीं
बता दें कि उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर की ओर से एक रिट पिटीसन में पारित आदेश दिनांक 08.07.24 के परिपालन में पशुओं को सड़क पर आने से रोकने के संबंध में कड़ी हिदायत जिला प्रशासन की ओर से दी गई है। इसके तहत जिले के सभी पशु मालिक अपने पशुओं को बांधकर रखने कहा गया है, जिससे पशुओं के सड़क पर आवाजाही पर नियंत्रण लग सके। निर्देश है कि पशुओं को आम मार्गों एवं सार्वजनिक स्थलों पर स्वतंत्र रूप से पशुपालक न ही छोड़ेंगे, और न ही एकत्रित होने देंगे, अन्यथा भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा-285, 291 के अंतर्गत सजा एवं जुर्माना से पशु पालकों को दण्डित किया जाएगा। साथ ही पशु क्रूरता अधिनियम 1960 के अध्याय 3 धारा-11 (1) तथा अन्य सुसंगत प्रावधानों के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद भी पालतू पशुओं का स्वच्छंद विचरण देखने को मिलना कहीं न कहीं दिए गए दिशानिर्देशों का पालन कराने में कमी को दृष्टिगोचर करा रहा है।
पशु मालिकों का आचरण दण्डनीय अपराध की श्रेणी में
पालतू पशुओं को सड़क पर छोड़ने से आम जनों को होने वाली दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा प्राप्त निर्देशों के तहत समय-समय पर निर्देश जारी किए गए हैं, साथ ही इस हेतु मानक संचालन प्रक्रिया जारी किया गया है। इसके बाद भी जिले के पशु पालकों द्वारा अपने पाल्य पशुओं का ठीक से पालन एवं देख-रेख न करते हुए आवारा छोड़ दिया जा रहा है। सड़कों पर आवारा मवेशियों के चलते-फिरते रहने से दुर्घटना की संभावना तो बढ़ती ही है, आम लोगों को जनधन की हानि भी होती है। पशु मालिकों का इस प्रकार गैर जिम्मेदारना एवं लापरवाही पूर्वक आचरण भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा-291 के अंतर्गत तथा पशु क्रूरता अधिनियम 1960 के अध्याय-3, धारा-11 (1) के अंतर्गत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

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