बच्ची की मौत के बाद आननफानन में टीम की जांच, और जारी कर दिया आदेश
अंबिकापुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम पिंडरा की संजना अगरिया, 3 माह की मौत के बाद बनी हंगामा की स्थिति, और आनन-फानन में वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा जांच, कार्रवाई के बाद स्टाफ नर्सों का किया गया निलम्बन काफी सुर्खियों में रहा। इसके बाद कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, सरगुजा ने पूर्व में जारी किए गए नर्सिंग स्टाफ के निलम्बन आदेश को शून्य घोषित कर दिया है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ फ्रंटलाइन ने ‘बलरामपुर जिला अस्पताल में बच्ची की मौत के बाद नर्सों का निलम्बन सवालों के घेरे मेंÓ शीर्षक के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
संभारग्रीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं सरगुजा संभाग डॉ. अनिल कुमार शुक्ला ने 19/09/2025
को जारी किए गए आदेश में उल्लेख किया है कि, दिनांक 12.09.2025 को जारी आदेश के तहत सतीश अरकसेल व श्रीमती नीतू केशरी पद-स्टॉफ परिचारिका (स्टॉफ नर्स) जिला चिकित्सालय बलरामपुर (छ.ग.) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर निलंबन अवधि में मुख्यालय कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बलरामपुर जिला-बलरामपुर (छ.ग.) नियत किए जाने संबंधी आदेश प्रसारित किया गया था। उक्त निलंबन आदेश के संबंध में श्यामाकांत तिवारी, संभागीय अध्यक्ष, सरगुजा संभाग छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने ज्ञापन 18.09.2025 को कार्यालय के समक्ष प्रस्तुत किया। उक्त ज्ञापन के अवलोकन उपरांत इस कार्यालय द्वारा जारी आदेश क्रमांक/924 स्थापना/नर्सिंग 2025 व आदेश क्रमांक 926, स्थापना/नर्सिंग 2025 अंबिकापुर दिनांक 12.09.2025 को आगामी आदेश तक शून्य घोषित किया जाता है। जिला चिकित्सालय बलरामपुर में 09.09.2025 को घटित घटना के संबंध में संभाग स्तरीय विभागीय जांच समिति के गठन उपरांत प्राप्त जांच प्रतिवेदन के आधार पर नियमानुसार आगामी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उल्लेख है कि यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा।
मामला 3 माह की बच्ची की मौत से जुड़ा
बीते 09 सितम्बर, मंगलवार को ग्राम पिंडरा की सनम अगरिया की 3 माह की बेटी संजना अगरिया को जिला चिकित्सालय बलरामपुर लाया गया था, जिसे गंभीर बता प्रारंभिक इलाज उपलब्ध कराने के बाद मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पताल अंबिकापुर भेजा गया था। बच्ची को स्वजन यहां लेकर पहुंचे, जांच के बाद चिकित्सक ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। बच्ची की मौत के बाद स्वजन जहां एक ओर जीवनरक्षक संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं करने के आरोप लगाए, वहीं लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा की स्थिति भी बनी थी। चिकित्सक के निर्देश के बावजूद बच्ची को बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के भेजने से जान जाने का आरोप स्वजन लगा रहे थे। इसके लिए नर्सों को किस आधार पर दोषी करार दिया गया, इसे लेकर सवाल उठ रहे थे। इसके पीछे कारण रेफर पर्ची में बच्ची को ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ भेजने के लिए किसी प्रकार का लिखित निर्देश नहीं दिया जाना रहा।

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