अंबिकापुर। मां के साथ सो रहा 4 माह का मासूम बच्चा चूल्हे की आग में झुलस गया, जिससे उसकी स्थिति गंभीर हो गई। मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। चूल्हे में घुसा बच्चा जोर-जोर से रो रहा था, लेकिन चंद फासले पर सो रही मां और परछी में सो रहे पिता इससे अनभिज्ञ रहे। पड़ोस में रहने वाली महिला, बच्चे के रोने का आवाज सुनकर पहुंची और उसे चूल्हे से बाहर निकाली। गहरी नींद में सो रहे माता-पिता ने जब बच्चे की स्थिति को देखा तो उनके होश उड़ गए।
जानकारी के मुताबिक जशपुर जिला के मनोरा थाना अंतर्गत ग्राम ककरौल निवासी विजय कुमार साय की पत्नी सिलमा बाई जमीन पर मच्छरदानी लगाकर 15 सितम्बर की रात को अपने 4 माह के पुत्र अयांस साय के साथ सो रही थी। बिस्तर से कुछ फासले पर स्थित चूल्हे का आग तो बुझ गया था, लेकिन गर्म राख था। संभवत: बच्चा खिसकते हुए मच्छरदानी से बाहर चूल्हे तक पहुंच गया, और गर्म राख की चपेट में आने के बाद जोर-जोर से रो रहा था। हैरत की बात यह है कि बच्चे की चीख-पुकार को न तो मां सुनी और न ही परछी की ओर सो रहे पिता को ही मासूम का रूदन सुनाई दिया। बच्चा खिसकते-खिसकते चूल्हे में घुस गया था। बच्चे की चीख-पुकार को पड़ोस में रहने वाली बुधनी बाई सुनी और दौड़ते विजय साय के घर में पहुंची। बच्चे को चूल्हे की तपिश के बीच देखकर वह शोर मचाते किसी तरह बाहर निकाली और झिंझोड़कर पास में ही सो रही बच्चे की मां को उठाई। नींद खुलने पर बच्चे की हालत को देखकर दोनों पति-पत्नी के होश उड़ गए। आननफानन में दोनों बच्चे को लेकर मनोरा अस्पताल पहुंचे। यहां से इलाज के बाद बच्चे के स्वास्थ्य में कुछ सुधार नजर आने पर उसे घर ले आए थे। 22 सितम्बर को पुन: तबियत बिगड़ने पर मनोरा स्वास्थ्य केन्द्र ले गए। यहां से प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सक ने बच्चे को रेफर कर दिया था। मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में उपचार के दौरान सोमवार को देर रात 12.30 बजे जीवन-मौत से संघर्ष कर रहे बच्चे की मौत हो गई। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम किया है। बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के बाद स्वजन के सुपुर्द कर दिया है।

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