ध्यानाकर्षण के बाद भी कमजोर पड़े बांध की जिम्मेदारों ने नहीं ली सुध, 3 की तलाश जारी
पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों को रद्द करके लुती ग्राम पहुंचे कृषि मंत्री रामविचार नेताम
बलरामपुर। विकासखंड के ग्राम लुती में स्थित करीब 44 वर्ष पुराने बांध का एप्रोच मेंटनेंस के अभाव में बह गया। झमाझम बारिश के बाद भी सुरक्षा की दृष्टि से जिम्मेदारों ने बांध को दुरूस्त कराने की सुध नहीं ली, न ही क्षतिग्रस्त हो चुके बांध के आसपास रहने वाले लोगों के रहने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई, जिससे मंगलवार को देर रात बड़ा हादसा हो गया, और 4 घर बह गए। एक परिवार के 4 लोगों का शव अब तक बरामद हो पाया है। पानी के तेज बहाव में बहे इसी परिवार के दो अन्य सदस्यों का पता नहीं चला है, एक अन्य परिवार के बच्चे लापता होने की बात भी सामने आ रही है। घायलों को स्थानीय जिला अस्पताल में उपचार सुविधा मुहैया कराई गई है, इनकी स्थिति ठीक बताई जा रही है। एक घायल की स्थिति गंभीर होने के कारण उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर लाकर भर्ती कराया गया है। एसडीआरएफ की टीम पानी से लबालब बांध में गायब लोगों को तलाश रही है। घटना में कई पालतू मवेशी भी काल-कलवित हुए हैं। घटना से गांव में शोक का माहौल है। दर्दनाक हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर बलरामपुर जिला कलेक्टर राजेन्द्र कुमार कटारा, पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारी पहुंचे, और क्षतिग्रस्त हुए बांध की स्थिति का जायजा लेने के साथ इनके मौजूदगी में बांध के पानी में बहे लोगों की खोजबीन शुरू की गई। प्रभावित ग्रामीणों को पंचायत भवन में शिफ्ट किया गया है।
जानकारी के मुताबिक मंगलवार की रात करीब 10-11 बजे मूसलाधार बारिश के बाद बलरामपुर विकासखंड के ग्राम विश्रामनगर में 1981 में बने 44 साल पुराने बांध का 100 मीटर हिस्सा पानी के बहाव में आ गया, पानी के तेज बहाव की चपेट में बांध के नीचे रहने वाले 3 घरों का लोग आ गए, इनमें से एक घर के लोगों को भागने या संभलने का मौका नहीं मिला। इनका घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। घर में मौजूद बहू और सास, क्रमश: रजनति पति गणेश 26 वर्ष व बतशिया पति रामवृक्ष 65 वर्ष की मौत हो गई, इसी परिवार के दो अन्य सदस्यों का शव बुधवार को बरामद किया गया, दो बच्चों का पता नहीं चल पाया है। रामवृक्ष भी पानी का तेज बहाव होने के कारण खुद को नहीं संभाल पाया और बहने लगा, करीब 300 मीटर दूर जाने के बाद उसको पेड़ का सहारा मिला जिससे उसकी जान बच गई। देर रात घटना की सूचना बलरामपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की मिली और वे मौके पर पहुंचे। सास-बहू का शव रात में ही बरामद करने के बाद प्रभावित मकान में रहने वाले अन्य लोगों की तलाश गांव के लोगों के साथ शुरू की गई। एसडीआरएफ की टीम ने खोजबीन में दौरान बुधवार को रामवृक्ष की एक और बहू चिंता पति सतजीवन 32 वर्ष व पोती प्रिया पिता सतजीवन 6 वर्ष का शव बरामद किया। अभी भी तीन लोगों का पता नहीं चल पाया है, इसमें इसी परिवार का आंगनबाड़ी में पढ़ने वाले कार्तिक पिता गणेश 4 वर्ष, एक अन्य घर का जीतन पिता बनधारी 7 वर्ष व गणेश का एक और बच्चा शामिल है। एसडीआरएफ की टीम इनके तलाश में लगी है। घायलों में माली चरण टोप्पो, फुलमनी टोप्पो, रामवृक्ष सहित कुछ अन्य का इलाज चल रहा है। अनूप सिंह पिता हीरा सिंह 25 वर्ष निवासी गणेशपुर को रेफर करने पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में भर्ती किया गया है।
मासूम बच्ची को हाथ में उठाकर तैरते निकले
बांध के नीचे करीब 500 मीटर की दूरी पर रहने वाले कालीचरण टोप्पो 60 वर्ष का 10 सदस्यीय परिवार हादसे में बाल-बाल बच गया। कालीचरण के परिवार में बंटू टोप्पो की 7 माह की बच्ची भी थी, जिसे दोनों हाथों में ऊपर उठाकर तैरते परिवार के सदस्यों ने बाहर निकाला। इन्होंने बताया कि देर रात अचानक पानी घर में अंदर घुसने लगा। वे कुछ समझ पाते इसके पहले 6 फीट पानी के घेरे में वे आ गए। किसी प्रकार से घर से तैरते वे बाहर निकले। परिवार के सदस्यों को बाहर निकालने के प्रयास में लगा कालीचरण इस दौरान पानी के बहाव में आ गया था, लेकिन पेड़ का सहारा मिलने के कारण उसकी भी जान बच गई, उसकी पत्नी फूलमनी टोप्पो 55 वर्ष पर घर का दीवार गिर गया, जिसे रेस्क्यू करके बाहर निकाल गया।
जल संसाधन विभाग की लापरवाही सामने आई
गांव के लोगों का कहना है कि जल संसाधन विभाग के द्वारा 44 वर्ष पुराने बांध के मेंटनेंस की ओर ध्यान नहीं दिया गया, जिस कारण बड़ी घटना हुई। ग्रामीणों ने विभाग के जिम्मेदारों को बांध के जर्जर होने और मंगलवार को शाम से ही पानी का रिसाव शुरू होने की सूचना दी थी, इसके बाद भी मरम्मत की ओर ध्यान नहीं दिया गया। बताया जा रहा है कि 100 मीटर के लगभग क्षतिग्रस्त हुए बांध के एप्रोच का दायरा बढ़ते गया और 500 मीटर तक मिट्टी धसक गया। और ऊपर बांध टूटता तो बड़ी हानि की स्थिति बन सकती थी, क्योंकि ऊपरी हिस्से में और अधिक बसाहट है। बाढ़ की बनी स्थिति के बीच ग्रामीणों की फसल भी चौपट हो गई।
पूर्व विधायक घटना का जायजा लेने पहुंचे
बांध से अचानक आए पानी के तेज बहाव ने कई मवेशियों की जान ले ली। जीतन पिता बंधारी की 40 बकरियां एवं कालीचरण की 7 बकरियों सहित 50 से अधिक बकरियां पानी के तेज बहाव में चली गईं। कई गायों का भी पता नहीं है, कुछ मवेशी मृत हाल में मिले हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी त्रासदी का उन्हें सामना करना पड़ेगा, नहीं मालुम था। घटना की सूचना पर पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा जल संसाधन विभाग की लापरवाही से घटना हुई है। ग्रामीणों ने पहले ही विभाग को सूचना दी थी कि बांध से पानी का रिसाव हो रहा है, इसके बाद भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे।

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