22 दिन से आंदोलन की राह में रहने के बाद भी मांग अधूरी
अंबिकापुर। सरगुजा जिले की 35 सौ मितानिनें प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ के आव्हान पर 7 अगस्त से अनिश्चितकालीन आन्दोलन की राह पर अग्रसर हैं। प्रदेश स्तर पर जंगी प्रदर्शन करने के बाद भी मितानिनें भाजपा सरकार के चुनावी घोषणा पत्र और मोदी की गारंटी को पूरा करने की मांग पूरी नहीं हो पाई है। आक्रोश इस बात का भी है कि तमाम त्योहार बीत रहे हैं, लेकिन इन्हें मई माह से गिनकर प्रतिमाह दी जाने वाली 22 सौ रुपये प्रोत्साहन राशि भी अप्राप्त है। ऐसे हालातों के बीच ये आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही हैं। इधर 22 दिनों से अनवरत काम से पृथक रहने के बाद भी सरकार इनकी मांगों के प्रति अभी तक गंभीर नहीं हुई है।
गुरूवार को मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एमसीएच परिसर से लगे अग्रसेन धर्मशाला में एकजुट मितानिनें अपनी व्यथा को आपस में साझा कीं। मितानिनों ने कहा तमाम पर्व, त्योहार बीत गए, पर चार माह से प्रोत्साहन राशि उन्हें नहीं मिल पाई है। इसके पहले इन्होंने 19 अगस्त को अंबिकापुर में लम्बी रैली निकाली थी और सरगुजा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रदेश स्तरीय मांगों से अवगत कराया था, साथ ही मैदानी स्तर पर तमाम जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बाद घोषणापत्र में उल्लेखित बातों की ओर ध्यान दिलाते हुए इसे अमल में लाने की गुहार लगाई थी। कलेक्टर सरगुजा ने मुलाकात करने पहुंचे मितानिनों के प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया था कि वे उनकी मांगों को शासन तक पहुंचा देंगे। प्रदेशभर में कलेक्टरों के माध्यम से अपनी मांगों को शासन तक पहुंचाने के बाद भी यथास्थिति बनी हुई है। मितानिनों का कहना है कि प्रदेशस्तर तक किए गए धरना-प्रदर्शन के बाद सरकार का अड़ियल रवैया उनकी उपेक्षा को दृष्टिगोचर कर रहा है। शासन-प्रशासन उन्हें स्वास्थ्य विभाग का रीढ़ कहता जरूर है, लेकिन चुनावी घोषणा पत्र 2023 व मोदी की गारंटी में किए गए वायदे की अनदेखी की जा रही है। मितानिन संघ की सरगुजा अध्यक्ष हेमंती लकड़ा, उपाध्यक्ष रमा शर्मा ने बताया कि हालात को देखते हुए निर्णय लिया गया है कि 31 अगस्त के पूर्व तक उनके पक्ष में किसी प्रकार का सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है, तो 1 सितम्बर को सरगुजा जिले व संभाग की मितानिनें रायपुर प्रस्थान करेंगी, और 2 सितम्बर को नया रायपुर में धरने पर बैठेंगी।
एनजीओ के अधीन नहीं करेंगे काम
मितानिन संघ की सरगुजा की जिला अध्यक्ष ने बताया कि उनकी मांग मितानिन कार्यक्रम में कार्यरत मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर का राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत संविलियन करना और वेतन, क्षतिपूर्ति में 50 प्रतिशत वृद्धि का वादा शासन पूरा करे, शामिल है। शासन उन्हें एनजीओ के अधीन करना चाहता है, इसके पक्षधर वे नहीं हैं। शासन को ठेका प्रथा पूरी तरह से बंद करना चाहिए। इनका दावा है कि उनके हड़ताल पर चले जाने से टीकाकरण का कार्य प्रभावित हो रहा है। वे गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाकर भर्ती कराने की सुविधा प्रदान करती थींं, जो बंद है। मितानिनों के कार्य पर नहीं रहने से मैदानी स्तर से कई जानकारी का आदान-प्रदान जिम्मेदारों तक नहीं हो पा रहा है।
भाजपा जिला अध्यक्ष से आज करेंगे मुलाकात
मितानिन संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि एक अगस्त को रायपुर रवानगी का उन्होंने निर्णय लिया है, इसके पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष से वे मुलाकात करेंगे। रमा शर्मा ने बताया कि भाजपा जिला अध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया से मोबाइल पर बात करने पर उन्होंने गुरूवार को व्यस्तता का हवाला देते हुए शुक्रवार को सुबह 10 से 11 बजे के बीच मुलाकात करने के लिए आश्वस्त किया है। उम्मीद है कि चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वायदों की ओर ध्यानाकर्षण कराने के बाद भाजपा संगठन की ओर से उनकी बातें शीर्ष तक पहुंचाई जाएगी और उनकी मांग पूरी होने का मार्ग प्रशस्त होगा।

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