अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 के तहत सरगुजा जिला प्रशासन ने अवैध गौ-मांस परिवहन में प्रयुक्त जीप वाहन क्रमांक सीजी 15 जेडी 0616 को राजसात करने का आदेश 7 अगस्त को व एक अन्य मामले में पिकअप को राजसात करने का आदेश 4 अगस्त को पारित किया है। यह आदेश कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी द्वारा 7 अगस्त को न्यायालयीन प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद दिया गया।
चौकी रघुनाथपुर पुलिस के अनुसार, 6 मार्च 2024 को ग्राम सिलसिला के पास एक जीप वाहन तेज और लापरवाही पूर्वक चलाते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। वाहन में सवार आरोपी विल्सन तिग्गा और ललित एक्का मौके से भागने का प्रयास कर रहे थे, जिन्हें वहां मौजूद प्रार्थी और गवाहों ने रोक लिया। वाहन की तलाशी में बोरी के अंदर 9 प्लास्टिक थैलों में करीब 11 किलो गौ-मांस, लोहे का गणासा, लकड़ी का बैत लगा लोहे की टांगी बरामद की गई। आगे की विवेचना में आरोपियों ने स्वीकार किया कि यह गौ-मांस ग्राम जजगा (थाना सीतापुर) निवासी विरेन्द्र उर्फ विजेन्द्र से लेकर अंबिकापुर ले जाया जा रहा था। घटना के दौरान वाहन की तेज गति के कारण यह दुर्घटनाग्रस्त हुआ। पुलिस ने आरोपियों का गवाहों के समक्ष मेमो कथन लिया और उनके निशानदेही पर वाहन व गौ-मांस को जप्त किया। बरामद मांस का पशु चिकित्सक द्वारा परीक्षण कराया गया, जिसमें यह सांड प्रजाति का पाया गया। पुलिस कार्रवाई और न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत पुलिस ने बरामद मांस के नमूने को मांस प्रजाति पहचान प्रयोगशाला हैदराबाद परीक्षण हेतु भेजा। जांच रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अधीक्षक सरगुजा ने वाहन राजसात करने का प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किया। आरोपियों विल्सन तिग्गा, ललित एक्का, विरेन्द्र तिर्की और इलियस बड़ा को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमाण्ड पर केंद्रीय जेल भेजा गया।
अधिवक्ता ने कहा वाहन अपराध में संलिप्त नहीं
वाहन स्वामी की ओर से अधिवक्ता ने न्यायालय में यह दलील दी कि उनका वाहन अपराध में संलिप्त नहीं था और झूठे आरोपों के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। वहीं उपलब्ध साक्ष्यों और पुलिस प्रतिवेदन पर विचार करने के बाद न्यायालय ने आरोपियों के खिलाफ अपराध सिद्ध मानते हुए वाहन को राजसात करने का आदेश दिया।
साक्ष्यों के आधार पर जिला दंडाधिकारी ने दिया आदेश
छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 5, 10 के तहत यदि किसी वाहन का उपयोग अवैध गौ-मांस परिवहन में किया जाता है तो जिला मजिस्ट्रेट ऐसे वाहन को अधिहरण कर सकता है। इसी प्रावधान के अंतर्गत जीप वाहन क्रमांक सीजी 15 जेडी 0616 को अधिहरण, राजसात करने की कार्रवाई की गई। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी ने पुलिस अधीक्षक के प्रतिवेदन से सहमति जताते हुए और सभी साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए जीप वाहन को राजसात करने का आदेश जारी किया है।
पुलिस का पीछा देखकर पिकअप को छोड़कर भागा था चालक
एक अन्य मामले में छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 एवं पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम 1960 के तहत सरगुजा जिला प्रशासन ने अवैध रूप से गाय-बैल की तस्करी में प्रयुक्त पिकअप वाहन क्रमांक जेएच 01 ईजी 7881 को राजसात करने का आदेश पारित किया है। यह आदेश कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी ने 4 अगस्त को न्यायालयीन कार्रवाई पूर्ण करके पारित किया।
29 सितंबर 2024 को थाना गांधीनगर पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर चठिरमा बेरियर पर वाहनों की सघन चेकिंग अभियान चलाया था। तड़के लगभग 5 बजे एक पिकअप वाहन पुलिस चेकिंग देखकर तेज गति से मुड़कर भागने लगा। पुलिस ने पीछा किया और वाहन को ठाकुरपुर रेलवे स्टेशन के पीछे सड़क के किनारे खड़ा पाया, चालक मौके से फरार हो गया था। जांच के दौरान वाहन में देशी नस्ल की 9 गाय और 1 बैल क्रूरतापूर्वक ठूंस-ठूंस कर भरे पाए गए, जिन्हें बूचड़खाना ले जाया जा रहा था। पशुओं का वैध दस्तावेजों के बिना परिवहन किया जा रहा था। पुलिस ने पिकअप वाहन सहित मवेशियों को जप्त कर थाना लाया और मामले की विवेचना प्रारंभ की। विवेचना में यह प्रमाणित हुआ कि आरोपी अवैध रूप से मवेशियों को काटने के लिए ले जाया जा रहा था। पुलिस अधीक्षक, सरगुजा ने घटना में प्रयुक्त वाहन को अपराध की पुनरावृत्ति पर अंकुश लगाने हेतु राजसात करने का प्रतिवेदन जिला दंडाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया। पंजीकृत वाहन स्वामी को नोटिस जारी किया गया, नोटिस तामिल होने के बावजूद वे न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। उपलब्ध साक्ष्यों, पुलिस प्रतिवेदन और अधिनियम के प्रावधानों का परीक्षण कर न्यायालय ने पाया कि आरोपी द्वारा वैध अनुमति के बिना पशुओं का परिवहन किया गया और उन्हें क्रूरता से भरकर ले जाया जा रहा था।
छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 5, 6 एवं छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण नियम 2014 के नियम-7 के तहत कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, सरगुजा ने पिकअप वाहन को राजसात, अधिहरण करने का आदेश दिया।

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